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हंतावायरस की नहीं है कोई वैक्सीन तो कैसे होगा इलाज ? क्या कोरोना की तरह फैलता है ये वायरस ?

हंतावायरस को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ गई है, खासकर लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius पर इसके मामले सामने आने के बाद। हालांकि कई लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी मान रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों वायरस पूरी तरह अलग हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख Tedros Adhanom Ghebreyesus ने साफ कहा है कि फिलहाल हंतावायरस से आम लोगों के लिए बड़ा खतरा नहीं है और इसे कोविड जैसी स्थिति से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है।

हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलने वाला वायरस है। यह इंसानों में तब पहुंचता है जब संक्रमित चूहों का मल, मूत्र या लार सूखकर हवा में मिल जाते हैं और लोग सांस के जरिए इन्हें अंदर ले लेते हैं। यह वायरस फेफड़ों और किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है। कोविड-19 की तरह यह आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता। विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ एंडीज स्ट्रेन में ही इंसान से इंसान संक्रमण की संभावना होती है और वह भी बहुत करीबी संपर्क में।

वहीं, इस वायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं, जिनमें बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और शरीर दर्द शामिल हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और फेफड़ों में पानी भर सकता है। हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम यानी HPS काफी खतरनाक माना जाता है और इसमें मौत का खतरा करीब 40 प्रतिशत तक बताया जाता है।

दुनिया में हर साल हजारों लोग हंतावायरस से संक्रमित होते हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई आधिकारिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। अमेरिकी कंपनी Moderna इस दिशा में रिसर्च कर रही है। कंपनी दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर mRNA तकनीक पर आधारित वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल यह रिसर्च शुरुआती यानी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और अभी इंसानों पर परीक्षण शुरू नहीं हुए हैं।

MV Hondius क्रूज शिप पर मामले सामने आने के बाद मॉडर्ना की इस रिसर्च को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी और कंपनी के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन बनने और आम लोगों तक पहुंचने में अभी कई साल लग सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हंतावायरस फिलहाल कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी बनने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि इसका फैलाव बहुत सीमित है। फिर भी यह एक गंभीर वायरस है और भविष्य में ऐसे संक्रमणों से बचाव के लिए दुनिया को पहले से तैयारी करनी होगी।

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