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SC: गुजरात के सोमनाथ में अवैध निर्माण हटाने पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यथास्थिति बनाए रखने की थी मांग

गुजरात के गिर सोमनाथ में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस मामले में न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिससे स्थानीय राजनीति और समुदायों में विवाद बढ़ सकता है।

मामला का पृष्ठभूमि

गुजरात सरकार ने सोमनाथ मंदिर के निकट अवैध निर्माण के खिलाफ एक बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया है, जिसके तहत 57 एकड़ क्षेत्र में फैले अवैध निर्माणों को ढहाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस कार्रवाई में कई मुस्लिम धार्मिक स्थलों और आवासों को भी शामिल किया गया है, जिसे स्थानीय समुदायों द्वारा विवादास्पद माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ द्वारा की गई। याचिका दायर करने वाली औलिया ए दीन समिति ने यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी। पहले सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने संभावित रूप से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने पर विचार किया, लेकिन सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया गया कि इस मामले में ऐसा आदेश देना आवश्यक नहीं है।

सरकार का आश्वासन

गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि अवैध निर्माणों से मुक्त कराई गई भूमि सरकार के पास रहेगी और इसे अगले आदेश तक किसी तीसरे पक्ष को आवंटित नहीं किया जाएगा। इसके आधार पर न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश देने से मना कर दिया।

उच्च न्यायालय का फैसला

इस मामले से संबंधित गुजरात उच्च न्यायालय का 3 अक्टूबर का फैसला भी महत्वपूर्ण है। उच्च न्यायालय ने सरकार को अवैध निर्माण हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की अनुमति दी थी, जिसके खिलाफ औलिया ए दीन समिति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

गुजरात सरकार के इस ध्वस्तीकरण अभियान का प्रभाव स्थानीय मुस्लिम समुदाय पर पड़ सकता है, जो इसे धार्मिक स्थानों और आवासों का नाश मानता है। सरकार का तर्क है कि ये निर्माण समुद्र से सटे अवैध हैं, लेकिन इससे समुदाय में असंतोष फैल सकता है।

अवैध निर्माण का तर्क

सरकार का कहना है कि ये अवैध निर्माण न केवल धार्मिक स्थलों के लिए खतरा हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए भी। समुद्र तट पर अवैध निर्माण को लेकर कानून और नियमों का उल्लंघन किया गया है। ऐसे में सरकार ने इन निर्माणों को हटाने का निर्णय लिया है ताकि कानून के अनुरूप स्थिति स्थापित की जा सके।

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