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SC begins hearing on Banke Bihari Temple Trust Ordinance: सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश पर सुनवाई शुरू की, दर्शन और पूजा समय को लेकर उठाए सवाल

SC begins hearing on Banke Bihari Temple Trust Ordinance: सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश पर सुनवाई शुरू की

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने मंदिर के दर्शन और प्रबंधन में बदलावों को चुनौती दी है। यह मामला धार्मिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 1939 की प्रबंधन योजना को बदलने और राज्य-नियंत्रित ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर के संचालन को प्रभावित करने से जुड़ा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के दैनिक पूजा समय और दर्शन के समय में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि दर्शन और अनुष्ठानों के समय का ऐतिहासिक महत्व है और इसे बदलना संवेदनशील मामला है। दीवान ने कहा कि दर्शन के समय में बदलाव का मतलब केवल समय का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की भावनाओं और अनुष्ठानों के अभिन्न हिस्से से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शन का समय और अनुष्ठान व्यवस्था इस प्रकार की जानी चाहिए कि श्रद्धालुओं के अनुभव में बाधा न आए

मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अगर दर्शन का समय बढ़ाया जाता है तो इसमें क्या समस्या है। उन्होंने कहा कि यह समय वह होता है जब अक्सर धनी लोग, जो भारी रकम का योगदान देते हैं, उन्हें विशेष अनुष्ठानों में भाग लेने की अनुमति दी जाती है। सीजेआई ने कहा कि इस प्रकार के लोग विभिन्न प्रथाओं में शामिल होते हैं और उन्हें आमंत्रित किया जाता है।

दीवान ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक अलग मुद्दा है। उनका कहना था कि उनका फोकस केवल दर्शन और अनुष्ठानों के समय और व्यवस्थाओं की संवेदनशीलता पर है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य चिंता भगदड़ जैसी स्थिति से जुड़ी है और श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा को सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सीजेआई ने सुनवाई के दौरान दूसरा सवाल उठाया, जो दैनिक पूजा की प्रथा से संबंधित था। उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि मूल समय में 10-15 हजार श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आती है, तो क्या यह वास्तव में समस्या पैदा करता है। दीवान ने कहा कि यह सही है, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मंदिर की व्यवस्था और दर्शन का समय इस प्रकार निर्धारित होना चाहिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा बनी रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर उच्चाधिकार समिति और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि जनवरी में अपने खुलने के पहले हफ्ते में इस मामले पर अगली सुनवाई होगी। इससे पहले, अदालत ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

मंदिर के दैनिक कामकाज की निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का उद्देश्य मंदिर के प्रबंधन और संचालन की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है।

वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि इस मामले में चार महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन पर अदालत को विशेष ध्यान देना चाहिए। पहला पहलू दर्शन के समय का ऐतिहासिक महत्व और उसके संवेदनशील बदलाव से जुड़े मुद्दे हैं। दूसरा पहलू भक्तों की संख्या और उनकी आवाजाही के नियंत्रण से जुड़ा है, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। तीसरा पहलू दैनिक पूजा और अनुष्ठानों की प्रथा को बनाए रखने से जुड़ा है। चौथा पहलू मंदिर के प्रबंधन और ट्रस्ट की संरचना से संबंधित है, जिसमें 1939 की योजना को बदलकर राज्य-नियंत्रित ट्रस्ट के माध्यम से संचालन को प्रभावी बनाना शामिल है

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और उनके संचालन में किसी भी तरह के बदलाव में श्रद्धालुओं की भावनाओं और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई में सभी पक्षों को अपने तर्क और सुझाव प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा।

इस मामले में अदालत की संवेदनशीलता और धार्मिक अधिकारों के साथ प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की भूमिका अहम मानी जा रही है। बांके बिहारी मंदिर एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, और इसके दर्शन और अनुष्ठान भारतीय संस्कृति और धार्मिक प्रथाओं का हिस्सा हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने यह संकेत दिया है कि अदालत धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में ऐतिहासिक और संवेदनशील पहलुओं को गंभीरता से देख रही है। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी, जिसमें मंदिर ट्रस्ट, राज्य सरकार और याचिकाकर्ता पक्ष के सभी तर्कों और प्रमाणों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

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