SI PAPER LEAK MAMLA : SI भर्ती पेपर लीक पर बवाल क्या इंसाफ दिलाएंगे बेनीवाल?
हनुमान बेनीवाल ने अपने भाषण में RPSC की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि RPSC में पारदर्शिता का अभाव है और यह संस्था लगातार भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार रही है। उनका कहना था, “अगर अब भी इस संस्था को पूरी तरह से भंग कर उसका पुनर्गठन नहीं किया गया, तो नौकरियों के नाम पर युवाओं के साथ यह धोखा बार-बार होता रहेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि SI भर्ती में भी भारी गड़बड़ी हुई है और यह भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। बेनीवाल ने यह भी कहा कि भर्ती में बेईमानी और पेपर आउट की शिकायतें सामने आने के बावजूद सरकार लीपापोती कर रही है।
बेनीवाल ने अपने तीखे भाषण में कहा, “जब तक SI भर्ती रद्द नहीं होती और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे।” उन्होंने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस सरकार ने युवाओं को सिर्फ बेरोजगारी, ठगी और अन्याय दिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार अगर सोचती है कि यह आंदोलन कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा, तो यह उसकी भूल है।
हनुमान बेनीवाल ने डॉक्टर राकेश बिश्नोई की आत्महत्या के प्रकरण को भी आंदोलन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तरह इस केस में सरकार को झुकने पर मजबूर किया गया, उसी तरह SI भर्ती के मामले में भी सरकार को पीछे हटना पड़ेगा।
गौरतलब है कि डॉक्टर राकेश बिश्नोई की आत्महत्या मामले में पिछले 7 दिनों से धरना चल रहा था, जो अब समाप्त कर दिया गया है। बेनीवाल और उनके समर्थक SMS अस्पताल के बाहर डटे रहे और सरकार पर दबाव बनाया। उनकी मांगों पर सरकार को झुकना पड़ा और कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल के साथ वार्ता के बाद कई निर्णय लिए गए।
राकेश बिश्नोई केस में सरकार की सहमति:
• मृतक डॉक्टर की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाएगी
• आरोपी एचओडी डॉ. राजकुमार राठौड़ को APO (Awaiting Posting Order) किया गया
• मामले की जांच आईएएस स्तर के अधिकारी से करवाई जाएगी
• मुआवजे पर निर्णय के लिए विशेष कमेटी का गठन किया गया
इन फैसलों को देखते हुए हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जब सरकार को एक बार झुकाया जा सकता है, तो बार-बार भी झुकाया जा सकता है – बशर्ते आंदोलन मजबूत हो और जनता एकजुट रहे।
बेनीवाल का आंदोलन न सिर्फ राजनीतिक विरोध का मंच बन गया है, बल्कि यह युवाओं की आवाज भी बनता जा रहा है। उनका स्पष्ट कहना है कि युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं होगा और अगर राज्य सरकार पारदर्शिता नहीं अपनाती है, तो आंदोलन और तेज़ होगा।
उन्होंने जनता और खासकर युवाओं से अपील की कि वे इस लड़ाई में शामिल हों और यह सुनिश्चित करें कि आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय न हो।
जयपुर की बारिश में भीगते हुए धरना देना केवल प्रतीक नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि यह आंदोलन केवल सत्ता विरोध नहीं बल्कि व्यवस्था के पुनर्गठन की मांग है। हनुमान बेनीवाल ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि RPSC को नए सिरे से खड़ा करना ही युवाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है – और इसका असर केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहेगा।
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