Ravi Kishan-Khesari Lal Yadav: रवि किशन-खेसारी लाल यादव के बीच छिड़ी जुबानी जंगRavi Kishan-Khesari Lal Yadav: रवि किशन-खेसारी लाल यादव के बीच छिड़ी जुबानी जंग

Ravi Kishan-Khesari Lal Yadav: रवि किशन-खेसारी लाल यादव के बीच छिड़ी जुबानी जंग

गोरखपुर के सांसद और भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता रवि किशन और बिहार के राजद प्रत्याशी व अभिनेता खेसारी लाल यादव के बीच शब्दों की जंग अब खुलकर सामने आ गई है। दोनों कलाकारों के बीच यह तकरार धार्मिक आस्था, विकास और राजनीति के मुद्दों पर केंद्रित होती जा रही है।

गोरखपुर में नौकायन पुलिस चौकी के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान रवि किशन ने बिना नाम लिए खेसारी लाल यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे सबके अच्छे की कामना करते हैं, लेकिन जब सनातन धर्म या प्रभु श्रीराम के मंदिर पर सवाल उठाया जाएगा, तो वे चुप नहीं रहेंगे। रवि किशन ने कहा, “हम तो सबके भले की बात करते हैं, लेकिन जहां सनातन विरोध की बात आएगी, प्रभु श्रीराम के मंदिर पर सवाल उठेगा, तो मेरा सगा भाई भी क्यों न हो, मेरे शब्द बाण से बच नहीं पाएगा।”

सांसद रवि किशन ने आगे कहा, “आप चुनाव लड़िए, जीतिए, आसमान में उड़ जाइए, लेकिन भगवान राम और सनातन का अपमान मत करिए। चाहे भाई हो या मां, यह बात बहुत चोट पहुंचाती है।” उन्होंने कहा कि वे एक ब्राह्मण परिवार से हैं और बचपन से पूजा-पाठ, शंख और घंटी की आवाज के बीच बड़े हुए हैं। अपने पिता को उन्होंने हमेशा ‘राम-राम’ कहते देखा है। उन्होंने कहा कि हजारों साधु-संत और हमारे पूर्वज राम के नाम पर जीए और इसी नाम पर प्राण त्याग दिए।

खेसारी यादव के राजनीतिक रुख पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करते हुए रवि किशन ने कहा, “चुनाव लड़िए, हर किसी को अधिकार है। लेकिन विचारों की लड़ाई लड़िए, विकास की बात करिए। बताइए कि आपने क्या किया? 2014 और आज के भारत में कितना फर्क है। हमें गर्व है कि हमारा देश, हमारी गोरखपुर नगरी कितनी सुंदर बन गई है। यहां अब भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग होती है, बाहर से लोग आते हैं। यह विकास का प्रतीक है।”

इस मौके पर रवि किशन ने केंद्र सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए SIR (सिटिजनशिप इश्यू रिफॉर्म) पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाने वालों को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से घुसपैठिए भारत में घुस चुके हैं, क्या उन्हें हटाया नहीं जाएगा? “उन्हें वोटर कैसे मानेंगे? हद हो गई है। चुनाव आयोग पर शक करना भी गलत है। बंगाल में चुनाव घुसपैठियों के मुद्दे पर ही लड़े जाते हैं। अब बिहार में भी वही आवाजें उठ रही हैं। लेकिन देश की सुरक्षा के मुद्दे पर सभी को परिपक्वता दिखानी चाहिए।”

वहीं दूसरी ओर, राजद प्रत्याशी और भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने भी रवि किशन पर पलटवार किया। हाल ही में ANI को दिए एक इंटरव्यू में खेसारी ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है देश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था। उन्होंने कहा, “श्रद्धा दिल में होती है, भगवान हमारे दिल में बसते हैं। मंदिर में भगवान नहीं रहते, वह तब प्रकट होते हैं जब हमारे मन में भक्ति होती है। मेरा कहना सिर्फ इतना है कि मंदिर जरूर बनना चाहिए, लेकिन लोगों का ख्याल भी रखा जाए।”

खेसारी यादव ने तंज कसते हुए कहा, “अगर आप मंदिर बना दें और लोगों के पेट में अन्न न दें तो भूखे पेट भजन कैसे होगा? पहले जनता का पेट भरिए, तब पूजा भी सच्ची होगी।” उन्होंने रवि किशन पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा, “रवि भइया की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। वो जीने के लिए कुछ नहीं बनाते, वो तो मरने के लिए व्यवस्था करते हैं। गोरखपुर में कहते हैं कि यहां मरने पर स्वर्ग मिलेगा। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अपनी जनता का जीते जी ख्याल रखिए, मरने के बाद क्या होगा, कोई नहीं जानता।”

खेसारी ने आगे कहा, “मरने के बाद का प्रोसीजर रवि भइया को बहुत प्यारा लगता है। वो चैन से जलाने की व्यवस्था तो करेंगे, लेकिन जीते जी जनता को चैन से जीने की व्यवस्था नहीं करते। वो कुछ भी बोल सकते हैं, वो महादेव हैं।”

खेसारी ने बिहार की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार बिहार को बस और ट्रेन का तोहफा देती है, लेकिन फैक्ट्रियां गुजरात में लगती हैं। मैं रवि भइया से कहूंगा कि वो मोदी जी से यह जरूर पूछें कि बिहार के युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिलता? बिहार के विकास पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता?”

दोनों भोजपुरी कलाकारों के बीच इस बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रवि किशन जहां भाजपा सांसद होने के नाते सरकार की नीतियों का बचाव कर रहे हैं, वहीं खेसारी यादव अपने चुनाव प्रचार में जनसरोकार और विकास के मुद्दों को उठाकर जनता का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं।

राम मंदिर, सनातन और विकास जैसे मुद्दों पर यह जुबानी जंग अब सिर्फ दो कलाकारों के बीच नहीं रही, बल्कि यह बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे चुकी है।

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