Former BJP MLA Raghavendra Pratap Singh: BJP के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का विवादित बयानFormer BJP MLA Raghavendra Pratap Singh: BJP के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का विवादित बयान

 

Former BJP MLA Raghavendra Pratap Singh: BJP के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का विवादित बयान

सिद्धार्थनगर के धनखरपुर गांव में 16 अक्टूबर को हुई एक जनसभा का वायरल वीडियो राजनीतिक और सामाजिक सद्भावना के लिहाज से चिंता का विषय बन गया है जिसमें भाजपा के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कथित रूप से ऐसे बयान दिए जो सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं

वीडियो में पूर्व विधायक ने दावा किया कि डुमरियागंज क्षेत्र से एक महीने के भीतर दो हिंदू लड़कियों ने मुसलमानों से शादी कर ली है और इसी को लेकर बुलाई गई बैठक में उन्होंने कहा कि इन दोनों लड़कियों के बदले दस मुस्लिम लड़कियों को “लाकर हिंदू बनाओ”, साथ ही यह भी कहा गया कि शादी-विवाह का पूरा खर्चा और सुरक्षा की गारंटी “हम” देंगे और जो हिंदू लड़का मुस्लिम लड़की लाएगा उसकी नौकरी का भी इंतजाम किया जाएगा

सभा में उन्होंने युवाओं से सीधे पूछा कि कितने तैयार हैं और कई बार यह उकसाने वाले कथन दोहराए गए, जैसे “दो के बदले दस” और “दो का बदला भारी होने वाला है”, साथ ही उन्होंने कहा कि जब से योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, तब से डुमरियागंज में इन लोगों का आतंक काम हुआ है और अब “डरने की जरूरत नहीं है” क्योंकि “योगी जी का जमाना” है और वे खुद “योगी जी का सिपाही” होने का हवाला देते दिखे, इन बयानों का सोशल मीडिया पर तेज़ी से प्रसार हुआ और वीडियो को लेकर शंका और नीतिगत आलोचना भी तेज हुई है

यूपी कांग्रेस ने पूर्व विधायक के बयान की कड़ी निंदा करते हुए X पर इसे शर्मनाक करार दिया और लिखा कि धर्म के नाम पर नफरत फैलाना, समाज को तोड़ना तथा बेरोजगार युवाओं को भटकाना भाजपा की असल राजनीति बन चुकी है, कांग्रेस के आरोपों में यह भी कहा गया कि ऐसे बयान समाज में विभाजन और साम्प्रदायिक हाथापाई का माहौल पैदा करते हैं और नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे शांति और संवैधानिक मूल्यों का पालन कराएं

घटना के विवरणों में बताया जा रहा है कि धनखरपुर में हुई इस सभा में पूर्व विधायक ने यह भी दावे के साथ कहा कि कई गांवों में पहले हिंदू डरकर रहते थे, बहुएँ और बेटियाँ सुरक्षित नहीं थीं तथा छेड़छाड़ और मारपीट जैसी घटनाएँ होती थीं—इनको लेकर उन्होंने लोगों से “जागने” और “मुकाबला” करने की अपील की, इसी दौरान उन्होंने मौलवियों और मुसलमानों को नाम लेकर चेतावनी भी दी

वायरल क्लिप के विश्लेषण में दिख रहा है कि सभा का वेश-भूषा और श्रोता वर्ग स्थानीय हैं तथा भाषण के दौरान कई बार हाथ उठवाने और समर्थन दिखाने का आग्रह भी किया गया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे सार्वजनिक बयानों से क्षेत्रीय शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होगी और क्या प्रशासन समय रहते भूमिका निभाएगा

घटना पर स्थानीय स्तर पर और राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं—कांग्रेस का पलटवार और सार्वजनिक बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों दिखाई दे रहे हैं, वहीं कुछ नागरिक और समुदाय के प्रतिनिधि चिंता जता रहे हैं कि ऐसा भाषण युवाओं में नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे सकता है और संवैधानिक अधिकारों तथा कानून के दायरे में इसका कड़ी कार्रवाई से निबटारा जरूरी है\

साथ ही यह भी ध्यान रखने योग्य है कि वायरल वीडियो में कही गई कुछ बातें सीधे किसी समूह के खिलाफ उकसाने वाली प्रतीत होती हैं, जो भारतीय दंड संहिता तथा संबंधित कानूनों के अंतर्गत भी सवाल खड़े कर सकती हैं, बावजूद इसके अभी तक किसी आधिकारिक जांच या प्राथमिकी की सूचना सार्वजनिक तौर पर नहीं मिली है—वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के स्तर पर क्या कदम उठाये जा रहे हैं

इस बारे में स्पष्ट विवरण का अभाव है; घटना की पृष्ठभूमि, भाषण के शब्द-शैली और मंचीय परिस्थिति को देखते हुए सामुदायिक प्रतिनिधियों, पुलिस और राजनीतिक दलों के बीच संवाद तथा शांतिपूर्ण समाधान की अपील की जा रही है,

जबकि विपक्षी दलों ने इसे भाजपा की राजनीति और सांप्रदायिकता पर साक्ष्य बताते हुए तीखी टिप्पणी की है और स्थानीय निवासियों में भय और असमंजस की स्थिति दिख रही है, ऐसे में मामले की सत्यनिष्ठ रूप से जांच, आवश्यक कानूनी कार्यवाही और स्थानीय शांति-व्यवस्था बनाए रखने के उपाय पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है ताकि क्षेत्र में किसी भी तरह की साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित न हो।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *