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PoK: ‘पीओके एक दिन हमारा होकर ही रहेगा; पाकिस्तान को आतंकवाद की भारी कीमत चुकानी होगी’, राजनाथ सिंह की दो टूक

देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और पाकिस्तान से जुड़े मामलों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से दुनिया के सामने रखा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन-2025 में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) एक दिन भारत का हिस्सा बनकर रहेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और अब भारत किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका यह बयान न केवल पाकिस्तान को सीधा संदेश है, बल्कि यह भारत की जनता के मन में बसे उस संकल्प को भी दोहराता है, जिसमें पीओके को देश का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।

पीओके पर भारत का रुख स्पष्ट

राजनाथ सिंह ने कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है और वहां के लोग हमारे अपने हैं। उन्होंने कहा, “पीओके एक दिन खुद कहेगा कि हम भारत का हिस्सा हैं।” यह कथन केवल भावनात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को हटाकर वहां के विकास को प्राथमिकता दी है, उसने पीओके के लोगों के बीच भी सवाल खड़े किए हैं। वहां की जनता अब तुलना करने लगी है कि भारत में रहकर एक नागरिक को कितने अधिकार और सुविधाएं मिलती हैं।

आतंकवाद पर भारत का नया दृष्टिकोण

रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर आतंकवाद को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “आतंकवाद का कारोबार चलाना अब लागत प्रभावी नहीं रहा। पाकिस्तान को अब इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अत्यंत नाजुक है और उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार जवाब देना पड़ रहा है कि उसने आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “हमने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों और बातचीत के दायरे को नए सिरे से निर्धारित किया है। अब जब भी बातचीत होगी, तो वह सिर्फ आतंकवाद और पीओके पर होगी।” यह बयान भारत की विदेश नीति में हुए महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। पहले जहां भारत कई मुद्दों पर बातचीत करता था, अब वह केवल दो बिंदुओं पर केंद्रित है – आतंकवाद और पीओके।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और मेक इन इंडिया की भूमिका

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से जिक्र किया और कहा कि इस अभियान ने देश की सैन्य क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता को दर्शाया है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में पूरे देश के लोगों ने मेक इन इंडिया अभियान की सफलता को देखा, समझा और महसूस किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि ‘मेक इन इंडिया’ न केवल भारत की समृद्धि, बल्कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक अनिवार्य घटक बन चुका है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “अगर हमारे पास अपनी सैन्य शक्ति नहीं होती, तो हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और निचले पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ इतनी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाते।” यह बयान भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करता है। भारत अब विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं रहना चाहता और देश में बने हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है।

विश्व में संघर्ष और भारत की भूमिका

रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में अस्थिरता और संघर्ष का माहौल है और इसका मुख्य कारण विश्वास की कमी है। ऐसे में भारत का कर्तव्य बनता है कि वह अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर चलते हुए एक संतुलन बनाए। उन्होंने कहा कि भारत ने शक्ति और संयम दोनों का बेहतरीन उदाहरण दुनिया के सामने रखा है।

राजनाथ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की सैन्य रणनीति में अब बदलाव हो चुका है। “पहले हम केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब हम दुश्मन के सैन्य ठिकानों और एयरबेसों को भी जवाब दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “करने को हम कुछ और भी कर सकते थे”, पर भारत ने संयम का परिचय दिया और दुनिया को दिखाया कि हम शक्ति के साथ विवेक का भी प्रयोग करते हैं।

पीओके की जनता को दिया भरोसा

अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने पीओके की जनता के लिए विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “पीओके के लोग हमारे अपने हैं, हमारे परिवार का हिस्सा हैं। हमें विश्वास है कि जो लोग आज राजनीतिक या भौगोलिक कारणों से भारत से अलग हो गए हैं, वे भी किसी दिन भारत की मुख्यधारा में लौट आएंगे।” यह बयान दर्शाता है कि भारत केवल क्षेत्रीय विस्तार की बात नहीं कर रहा, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से पीओके के नागरिकों को अपने साथ जोड़ना चाहता है।

कूटनीतिक संदेश: दुनिया को भारत की स्थिति समझनी होगी

राजनाथ सिंह के इन बयानों को केवल आंतरिक राजनीति के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह बयान पूरी दुनिया के लिए संदेश है – विशेषकर उन देशों के लिए जो पाकिस्तान को समर्थन देते हैं या आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया को समझने में असमर्थ रहे हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देगा, बल्कि proactive रणनीति अपनाएगा।

भारत की रणनीति में स्पष्टता और संकल्प

राजनाथ सिंह के पूरे वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि भारत की रक्षा नीति अब किसी संदेह या संशय पर आधारित नहीं है। इसमें स्पष्टता है, दृढ़ संकल्प है और एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण भी। पीओके को भारत में मिलाने का संकल्प केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय लक्ष्य बनता जा रहा है।

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