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बिहार: मुजफ्फरपुर में बड़ी कार्रवाई की तैयारी, बूढ़ी गंडक की जमीन से हटेंगे अवैध कब्जा

बिहार: मुजफ्फरपुर में बड़ी कार्रवाई की तैयारी

बिहार में अतिक्रमण हटाने की मुहिम इन दिनों जोर पकड़ चुकी है। पटना, गया, दरभंगा, भागलपुर समेत कई जिलों में सड़क, सरकारी भूमि, तालाब व नदियों की जमीन पर बसे अवैध कब्जों पर बुलडोजर लगातार चल रहा है। इसी अभियान के तहत अब मुजफ्फरपुर में भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। शहर के बीच बहने वाली बूढ़ी गंडक नदी की पेटी में दशकों से बसे सैकड़ों परिवारों पर प्रशासन का शिकंजा कसने वाला है।

मुजफ्फरपुर की पहचान मानी जाने वाली बूढ़ी गंडक नदी कभी शहर का प्राकृतिक जीवन-रेखा थी, लेकिन बीते कई वर्षों में नदी के किनारे अवैध रूप से दर्जनों बस्तियाँ बस गईं। खासकर सिकंदरपुर क्षेत्र में नदी की पेटी में बसा “कर्पूरी नगर” नामक इलाका पूरी तरह अतिक्रमण पर आधारित है। यहां सैकड़ों परिवार कई सालों से रह रहे हैं। नदी की जमीन पर बसे ये लोग ज्यादातर भूमिहीन हैं, जो मजबूरी में झोपड़ियां डालकर गुजर-बसर करते हैं

स्थानीय लोगों का कहना है कि, उनके पास रहने के लिए और कोई विकल्प नहीं है। हर साल बूढ़ी गंडक में पानी बढ़ने पर उन्हें बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, कच्चे घर बह जाते हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला। पुल निर्माण या अन्य परियोजनाओं के दौरान कुछ परिवारों को विस्थापित भी किया गया, लेकिन उन्हें नदी के दूसरी ओर उसी पेटी में शिफ्ट कर दिया गया। इससे समस्या खत्म होने के बजाय और जटिल होती गई।

नदी किनारे महज झोपड़ियां ही नहीं, बल्कि कई पक्के मकान भी बने हुए हैं। इनके मालिकों का दावा है कि यह मकान निजी जमीन पर बने हैं और उनकी रजिस्ट्री पूरी तरह वैध है। लेकिन प्रशासन अब बारीकी से जांच कर रहा है कि कौन-सी जमीन वास्तव में नदी की प्राकृतिक धारा का हिस्सा है और कहां किस तरह का अतिक्रमण हुआ है। यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्षों से नदी की पेटी में मोहल्ले बसने से बूढ़ी गंडक की जलधारा बाधित हो रही है। शहर में जलजमाव की समस्या भी इसी कारण बढ़ी है

जल विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक नदी की भूमि पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त नहीं होगी, तब तक शहर को बाढ़ और जलजमाव से राहत मिलना मुश्किल है। नदी के प्रवाह में बाधा आने से प्राकृतिक निकासी व्यवस्था चरमरा जाती है, जिससे वर्षा के मौसम में शहर के कई इलाके डूब जाते हैं।

अतिक्रमण पर संभावित कार्रवाई को लेकर SDM पूर्वी तुषार कुमार ने स्पष्ट कहा है कि अब किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनके अनुसार प्रशासन ने पहले ही चिन्हित क्षेत्रों की लिस्ट तैयार कर ली है और जल्द ही सर्वे कर चरणबद्ध तरीके से बुलडोजर चलाया जाएगा

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई परिवार भूमिहीन है, तो उन्हें बेघर नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशासन ऐसे परिवारों को वासकित पर्चा देकर सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था करेगा। इसका उद्देश्य अवैध कब्जा हटाना तो है ही, साथ ही कमजोर आर्थिक वर्ग को नई समस्या में न धकेलना भी है।

मुजफ्फरपुर में इस खबर के बाद खलबली मच गई है। कर्पूरी नगर के साथ-साथ आसपास के अन्य अतिक्रमित क्षेत्रों में भी लोग चिंता में हैं। कई परिवार सर्वे टीम के आने से पहले ही दस्तावेज तैयार करने में जुट गए हैं, जबकि भूमिहीन परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह कार्रवाई सख्ती और संवेदनशीलता—दोनों के साथ की गई, तो मुजफ्फरपुर शहर को इससे दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। नदी का स्वरूप बहाल होगा, बाढ़ व जलजमाव से राहत मिलेगी और शहर की निकासी प्रणाली में सुधार आएगा

मुजफ्फरपुर प्रशासन की यह कार्रवाई पूरे जिले के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यदि बूढ़ी गंडक की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान सफल हुआ, तो यह मॉडल दूसरे जिलों में भी अपनाया जा सकता है।फिलहाल मुजफ्फरपुर वासियों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि अवैध बस्तियों का भविष्य क्या होगा और क्या शहर को उसकी नदी फिर से अपने मूल स्वरूप में मिल पाएगी।

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