प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि, मंदिर जाना तभी सच में काम आता है जब इंसान का मन पवित्र हो और वो अच्छे कर्म करता है। अगर दिल में सच्ची श्रद्धा और व्यवहार हो तभी ईश्वर की कृपा बनी रहती है और भगवान की पूजा का फल मिलता है।
महाराज जी ने आगे कहा कि, लोग विश्वास और श्रद्धा के साथ भगवान की पूजा करते हैं, तीर्थ यात्रा पर जाते हैं , मंदिरों में दर्शन करते हैं। पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन के माध्यम से वे भगवान का स्मरण करते हैं और ऐसा माना जाता है कि जब इंसान दिल से भक्ति करता है, तो उसका मन शांत रहता है, और मन में शांति रहती है तो जीवन में संतुलन भी बना रहता है। लेकिन हर व्यक्ति को भक्ति का फल एक जैसा मिले, यह जरूरी नहीं है। किसी को कितना पुण्य मिलेगा, यह उसकी सोच, व्यवहार और कर्मों पर निर्भर करता है।
प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि कुछ लोग चाहे कितनी भी पूजा करें या कितने ही मंदिरों के दर्शन कर लें, फिर भी उन्हें उसका पुण्य नहीं मिलता और इसके पीछे कारण उनका गलत आचरण और अशुद्ध विचार होते हैं। जो मनुष्य बुरा काम करता है, दूसरों को दुख पहुंचाता है या मन में बुरी सोच रखता है, उसकी पूजा का कोई फायदा नहीं होता अगर कोई सिर्फ भक्त बनने का दिखावा करता है, लेकिन उसका दिल साफ नहीं है, तो मंदिर जाना भी बेकार है।
उन्होंने आगे कहा कि, भगवान हर व्यक्ति के हृदय में रहते हैं और हमारे सभी कर्मों को देख रहे हैं। हम दूसरों के सामने कुछ भी दिखा सकते हैं, लेकिन भगवान से कुछ छिप नहीं सकता।
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