दिल्ली

Pollution: दिल्ली में प्रदूषण और धुंआ का ‘डबल अटैक’, सामने आए डराने वाले आंकड़े; इन बातों का रखें खास ध्यान

दिल्ली का हाल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, 1 नवंबर को सुबह 6 बजे दिल्ली के आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 395 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है। दिवाली की सुबह जब दिल्ली-एनसीआर के लोग उठे, तो चारों ओर स्मॉग और प्रदूषण का दृश्य देखने को मिला। नोएडा, गुरुग्राम और अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति समान रूप से चिंताजनक थी।

प्रदूषण के कारण
हाल के हफ्तों में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई थी, और दिवाली के दौरान पटाखे जलाने से यह और अधिक खराब हो गई। विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि त्यौहार के बाद वायु गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। दीपावली के बाद की सुबह, लोगों ने जहरीले धुएं की चादर को महसूस किया।

स्वास्थ्य प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से सांस और हृदय रोगों वाले व्यक्तियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययनों के अनुसार, वायु प्रदूषण सभी आयु वर्ग में स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकता है। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक दुष्प्रभाव होता है। इसलिए, घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनना जरूरी हो गया है।

डॉक्टरों की सलाह
डॉ. अभिजात सहाय, एक श्वसन रोग विशेषज्ञ, ने बताया कि हर साल दिवाली के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उन्होंने सभी से अपील की है कि वे स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

पटाखों से प्रदूषण
पटाखों के जलाने से सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, और अन्य हानिकारक कण वायु में मिल जाते हैं, जो श्वसन प्रणाली को प्रभावित करते हैं। यह प्रदूषण सांस लेने में कठिनाई और अस्थमा के दौरे का कारण बन सकता है। विशेषकर अस्थमा के रोगियों को अगले कुछ हफ्तों तक अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

मौतों का आंकड़ा
2021 में, मेडिकल जर्नल “द लैंसेट” की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण भारत में 16 लाख से अधिक मौतें हुईं। इनमें से 38% मौतें जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला और तरल प्राकृतिक गैस के उत्सर्जन से संबंधित थीं। लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज 2024 के अनुसार, बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों, फेफड़ों के कैंसर, मधुमेह, और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं को बढ़ा रहा है।

पीएम 2.5 का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद छोटे कण, विशेषकर पीएम 2.5, बहुत खतरनाक होते हैं। ये कण आसानी से फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। डॉक्टर अभिजात ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता खराब बनी रह सकती है। ओपीडी में सांस की समस्याओं वाले मरीजों की संख्या पिछले महीने में बढ़ी है और यह संख्या आगे भी बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय
वायु प्रदूषण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मास्क पहनना है। जब भी बाहर निकलें, मास्क पहनें और भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें। जिन लोगों को पहले से ही श्वसन संबंधी समस्याएँ हैं, उन्हें हमेशा अपने पास इनहेलर रखना चाहिए। अगर किसी को सांस लेने में कठिनाई या अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ महसूस होती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।

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