महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है, और इस बार सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। सभी पार्टियों ने चुनावी मैदान में उतरने के लिए कमर कस ली है। इस चुनाव में महायुति (बिजेपी-शिवसेना) और एमवीए (महाविकास आघाड़ी) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी के नेताओं को नसीहत दी है कि वे चुनावी वादे बजट के आधार पर करें। उन्होंने कहा कि गारंटी की संख्या बढ़ाने के बजाय, नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जो वादे करें, वे व्यावहारिक हों। खरगे ने चेतावनी दी कि अगर वे बिना बजट की व्यवस्था किए वादे करते हैं, तो इससे पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है। उनका कहना था, “यदि सड़कों के लिए पैसे की कमी है, तो जनता का भरोसा जीतना मुश्किल होगा।”
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता संजय राउत ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, और ऐसे में उनसे निष्पक्ष चुनाव कराने की उम्मीद नहीं की जा सकती। राउत ने यह भी कहा कि अगर झारखंड के डीजीपी को बदलने का फैसला लिया गया है, तो महाराष्ट्र में ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कुछ नेताओं की संपत्ति के बारे में भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की संपत्ति में 2019 से 2024 के बीच 50 से 100 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो कि चिंताजनक है। उनका यह भी कहना था कि यह सब महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ है और यह दर्शाता है कि निर्णय केवल व्यक्तिगत हितों के लिए लिए गए हैं
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