भारत ने शनिवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। देश की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंच गया। इस बड़ी उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कंपनी की पूरी टीम को फोन कर बधाई दी और उनके काम की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने टीम से बातचीत के दौरान कहा, “स्काईरूट की पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई। मुझे विश्वास है कि आप लोग अपने आने वाले लक्ष्य भी समय से पहले पूरे करेंगे।” प्रधानमंत्री ने इस सफलता को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।
मिशन ‘आगमन’ रहा पूरी तरह सफल
स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ऑर्बिटल मिशन ‘आगमन’ के तहत विक्रम-1 रॉकेट को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से लॉन्च किया। रॉकेट ने अपने सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और करीब 450 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में अपने पेलोड्स को सफलतापूर्वक स्थापित किया। यह पहली बार है जब किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल रॉकेट ने पहली ही कोशिश में लॉन्च से लेकर सैटेलाइट तैनाती तक का पूरा मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया है।
अंतरिक्ष तक पहुंचा पीएम मोदी का ‘वंदे मातरम्’
इस मिशन की एक खास बात यह भी रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित ‘वंदे मातरम्’ संदेश भी विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष की कक्षा तक पहुंचा। इसे भारत की वैज्ञानिक प्रगति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों है यह उपलब्धि खास?
विक्रम-1 की सफलता के साथ भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि दिखाती है कि अब भारतीय निजी कंपनियां भी ऑर्बिटल रॉकेट विकसित कर उन्हें सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखती हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस सफलता के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां ऑर्बिटल लॉन्च करने में सक्षम हैं। इससे भविष्य में कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च और स्पेस बिजनेस के नए अवसर भी खुलेंगे।
देशभर में खुशी का माहौल
विक्रम-1 की कामयाबी के बाद वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पूरे देश में खुशी का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भारत को वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में और मजबूत बनाएगी तथा आने वाले समय में निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए नए रास्ते खोलेगी।
