BSF जवान को पाकिस्तानी रेंजर्स ने रिहा करने से किया इनकार, पति की रिहाई के लिए तड़प रही पत्नी

भारत-पाक सीमा पर तनाव

पाकिस्तान रेंजर्स बीएसएफ जवान को भारत को सौंपने में आनाकानी कर रहे हैं। दरअसल बीएसएफ (BSF) जवान पाकिस्तानी सीमा में चले गए थे। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात बीएसएफ की 182वीं बटालियन के जवान पूर्णम साहू को करीब 4 दिन पहले पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश करने के बाद हिरासत में ले लिया गया था। बीएसएफ के कांस्टेबल पीके शाह, जो कोलकाता के निवासी हैं, गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए। ये घटना बुधवार शाम की है, जब वो सीमा पर गश्त कर रहे थे। मौसम की खराबी और घने कोहरे के कारण उन्होंने अनजाने में सीमा पार कर दी…जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया।

BSF जवान को रिहा नहीं कर रहा पाकिस्तान

इस घटना के बाद, भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान से जवान की रिहाई की मांग की। हालांकि, पाकिस्तान रेंजर्स ने शुरू में रिहाई से इनकार कर दिया। इस स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच कई फ्लैग मीटिंग्स आयोजित की गईं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आया है। इस बीच, जवान की पत्नी रजनी शाह कोलकाता से पंजाब के लिए रवाना हो गई हैं, ताकि वह अपने पति की रिहाई के लिए अधिकारियों से मिल सकें। इस घटना के समय जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा 26 पर्यटकों की हत्या की खबर भी आई थी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ऐसी परिस्थितियों में, बीएसएफ जवान की पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में होना एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

जवान की पत्नी ने की सरकार से मांग

इस घटना से ये साफ है कि सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंता कितनी महत्वपूर्ण है। सूत्रों ने बताया कि उक्त जवान की पत्नी रजनी शाह कोलकाता से अपने पति की रिहाई को लेकर पंजाब आ रही है। आपको बता दें कि कई बार पाकिस्तानी गांव से बच्चे और लोग गलती से भारत की सीमा में घुस जाते हैं क्योंकि पाकिस्तान की तरफ कोई फेंसिंग नहीं लगी है सिर्फ एक सफेद पिल्लर है वह भी काफी दूरी पर लगे हैं। जबकि इंडिया की तरफ जो फेंसिंग की गई है उस तरफ भी भारत की काफी जमीन है। ऐसे में कई बार पाकिस्तानी ग्रामीण भारत के इलाके में आ जाते थे तो बीएसएफ उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्सों को सौंप देती थी।

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