उत्तराखण्ड

Paddy Planting: उत्तराखंड की राजनीति में ‘धान रोपाई’ से गरमाया माहौल, हरीश रावत ने की सीएम धामी की राहुल गांधी से तुलना, हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर ली पुष्कर धामी की चुटकी

Paddy Planting: उत्तराखंड की राजनीति में ‘धान रोपाई’ से गरमाया माहौल

 

उत्तराखंड की राजनीति में अब खेतों की मेड़ (Paddy Planting) पर भी सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का खेत (Paddy Planting) में उतरकर हल चलाना और धान की रोपाई (Paddy Planting) करना, एक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हवा दे दी, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर धामी की तुलना कांग्रेस नेता राहुल गांधी से कर डाली।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, जिन्हें लोग ‘हरदा’ के नाम से जानते हैं, ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री धामी और राहुल गांधी दोनों की धान रोपाई (Paddy Planting) करते हुए तस्वीरें साझा कीं और लिखा—
“पुष्कर जी, ये देखना अच्छा लगा कि आपने कम से कम इस दिशा में (Paddy Planting) राहुल गांधी का अनुसरण किया।”

Paddy Planting: उत्तराखंड की राजनीति में ‘धान रोपाई’ से गरमाया माहौल

रावत की यह टिप्पणी सधी हुई राजनीतिक चुटकी थी, लेकिन इसने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया। कांग्रेस नेता जहां इस पोस्ट को हल्के-फुल्के अंदाज में ले रहे हैं, वहीं बीजेपी ने इसे राहुल गांधी पर हमला करने के अवसर के रूप में भुना लिया।

हरीश रावत (Paddy Planting) की पोस्ट पर पलटवार करते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीखा बयान जारी किया। उन्होंने कहा—
“राहुल गांधी तो चांदी की चम्मच मुंह (Paddy Planting) में लेकर पैदा हुए हैं। उन्हें खेती-किसानी (Paddy Planting) की वास्तविकता का कोई अनुभव नहीं है।”

भट्ट ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री धामी एक सैनिक और किसान के घर में जन्मे हैं, खेती उनके जीवन का हिस्सा रही है। “उन्हें खेतों में काम करना आता है, जबकि राहुल गांधी को बैल और गाय में फर्क तक नहीं पता,” उन्होंने जोड़ा।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री धामी का खेत में उतरना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि जनता से जुड़ाव दिखाने की रणनीति का हिस्सा है।

खासकर ग्रामीण और किसान समुदाय में अपनी छवि मजबूत करने के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वहीं, कांग्रेस इसे एक राजनीतिक नौटंकी करार दे रही है। हरीश रावत का यह पोस्ट उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें धामी के इस कदम को राहुल गांधी के ‘ग्राउंड कनेक्ट’ की नकल बताया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि राहुल गांधी हाल ही में हरियाणा और पंजाब में किसानों के बीच जाकर धान रोपाई और ट्रैक्टर चलाते हुए नजर आए थे। कांग्रेस इसे उनके “धरातली नेतृत्व” की मिसाल बता रही है। ऐसे में जब मुख्यमंत्री धामी भी खेत में दिखे, तो तुलना होना लाजमी था।

अब बड़ा सवाल यह है कि सियासी जमीन पर धान रोपाई की यह तस्वीर किसे लाभ पहुंचाएगी? बीजेपी को लगता है कि मुख्यमंत्री का यह ‘धरती से जुड़ा हुआ’ रूप उन्हें आम जनता के करीब लाता है। वहीं कांग्रेस इसको सिर्फ एक दिखावा बताकर जनता को सचेत करने की कोशिश कर रही है।

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