भारत के लिए ट्रैक एंड फील्ड की दुनिया में स्वर्ण अक्षरों से नाम दर्ज कराने वाले नीरज चोपड़ा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकते नजर आए हैं। पेरिस डायमंड लीग 2025 में उन्होंने 88.16 मीटर की दूरी तय कर न सिर्फ खिताब जीता, बल्कि एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह विश्व स्तरीय भाला फेंक खिलाड़ियों में सर्वोपरि हैं। ओलंपिक से लेकर डायमंड लीग तक, नीरज के थ्रो में जितनी तकनीक है, उतनी ही ताकत, आत्मविश्वास और देश के लिए गौरव की भावना भी। आइए, नजर डालते हैं उनके 11 सर्वश्रेष्ठ थ्रो पर, जिन्होंने उन्हें आज के दौर का सबसे प्रतिष्ठित जेवलिन थ्रोअर बना दिया है।
नीरज चोपड़ा का सुनहरा सफर: थ्रो बाय थ्रो
नीरज चोपड़ा ने आखिरकार उस आंकड़े को पार किया, जिसे लेकर पूरी दुनिया में उनकी चर्चा हो रही थी – 90 मीटर। दोहा डायमंड लीग के 2025 संस्करण में नीरज ने 90.23 मीटर दूर भाला फेंककर इतिहास रचा। हालांकि, वे इस थ्रो के बावजूद दूसरे स्थान पर रहे, क्योंकि जर्मनी के जूलियन वेबर ने अंतिम प्रयास में 91.06 मीटर का थ्रो करके जीत दर्ज की। नीरज का यह थ्रो उनकी तकनीकी परिपक्वता और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।
2022 में स्टॉकहोम डायमंड लीग में नीरज ने 89.94 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा। यह थ्रो न केवल दूरी में प्रभावशाली था, बल्कि इसने उन्हें एक सशक्त विश्व दावेदार के रूप में पेश किया।
पेरिस ओलंपिक 2024 के फाइनल में नीरज का 89.45 मीटर का थ्रो पूरे भारत को गर्व से भर देने वाला रहा। हालांकि वह इसके बाद कोई और वैध थ्रो नहीं कर पाए, लेकिन उनका यह प्रयास पदक जीतने के लिए काफी था। यह थ्रो नीरज के करियर का तीसरा सर्वश्रेष्ठ रहा।
2023 में दोहा में आयोजित डायमंड लीग में नीरज ने पहले ही प्रयास में 88.67 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक हासिल किया। यह थ्रो उनकी निरंतरता और टॉप-लेवल परफॉर्मेंस का परिचायक रहा।
हंगरी में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज ने 88.17 मीटर दूर भाला फेंककर न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि इतिहास रचते हुए इस प्रतियोगिता में विजेता बनने वाले पहले भारतीय बन गए। इसी प्रदर्शन के बल पर उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया।
2025 में पेरिस डायमंड लीग में नीरज ने 88.16 मीटर की दूरी तय करते हुए एक और खिताब अपने नाम किया। उन्होंने यह दूरी पहले ही प्रयास में तय की। हालांकि वह यहां 90 मीटर पार नहीं कर सके, लेकिन यह प्रदर्शन उन्हें प्रतियोगिता का विजेता बनाने के लिए काफी रहा।
2022 में अमेरिका में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज ने 88.13 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता। वह इस चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बने। इस प्रयास ने उनके करियर को नई दिशा दी।
नीरज का 88.06 मीटर का थ्रो एशियन गेम्स 2018 में उनके शानदार प्रदर्शन का प्रतीक रहा। इस थ्रो ने उन्हें एशियाई खेलों का चैंपियन बना दिया और भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। यहीं से नीरज के अंतरराष्ट्रीय करियर की ऊंची उड़ान शुरू हुई।
ब्रसेल्स में हुए डायमंड लीग फाइनल 2024 में नीरज ने 87.86 मीटर की दूरी तय की और दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि वे खिताब नहीं जीत सके, लेकिन इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि वह लगातार टॉप 3 में रहने वाले एथलीट हैं।
स्विट्ज़रलैंड के लुसान शहर में 2023 में आयोजित डायमंड लीग में नीरज ने 87.66 मीटर का थ्रो किया और स्वर्ण पदक जीता। यह थ्रो उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में किया और निर्णायक साबित हुआ।
टोक्यो ओलंपिक 2020 नीरज चोपड़ा के जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा। यहां उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर दूर भाला फेंककर भारत को ट्रैक एंड फील्ड में पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल दिलाया। इस एक थ्रो ने उन्हें रातोंरात राष्ट्रीय हीरो बना दिया।
90 मीटर क्लब में नीरज
नीरज चोपड़ा ने मई 2025 में दोहा डायमंड लीग के दौरान 90.23 मीटर का थ्रो कर ’90 मीटर क्लब’ में प्रवेश किया। वह दुनिया के 25वें और एशिया के तीसरे खिलाड़ी बने जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। उनसे पहले पाकिस्तान के अरशद नदीम (92.97 मीटर) और चीनी ताइपे के चाओ सुन चेंग (91.36 मीटर) इस क्लब में शामिल हो चुके थे।
कड़ी टक्कर: जूलियन वेबर और अन्य प्रतियोगी
नीरज चोपड़ा को अक्सर कड़ी टक्कर जर्मनी के जूलियन वेबर से मिलती रही है। पेरिस डायमंड लीग 2025 में भी वेबर ने 87.88 मीटर का थ्रो कर दूसरा स्थान पाया। दोनों के बीच यह मुकाबला रोमांचक रहा और दोनों के प्रदर्शन ने प्रतिस्पर्धा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इसके अलावा ब्राजील के लुइस मौरिसियो दा सिल्वा ने भी 86.62 मीटर का थ्रो कर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
नीरज की सफलता का राज
नीरज चोपड़ा की सफलता के पीछे कई कारक हैं:
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