प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश की पावन नगरी वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन ने सहकारी आंदोलन के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 9-10 अप्रैल 2026 को आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य संदेश स्पष्ट था कि, अब समय केवल योजनाओं पर विचार-विमर्श करने का नहीं, बल्कि उन्हें जिला स्तर पर निर्णायक रूप से लागू करने और ठोस परिणाम प्राप्त करने का है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय जिस परिवर्तनकारी एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है, उसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भुटानी ने सहकारी क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए एक नए उत्साह का संचार किया। उन्होंने अमूल और सारस्वत सहकारी बैंक के उत्कृष्ट प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि, सहकारी मॉडल की सफलता वैश्विक स्तर पर सिद्ध हो चुकी है और अब भारत के हर जिले में इसी ऊर्जा के साथ सुधारों के अगले चरण को लागू करना होगा।
अक्टूबर 2024 से शुरू हुई कार्यशालाओं की श्रृंखला में ये सातवां आयोजन था। डॉ. भुटानी ने इस बात पर जोर दिया कि, पिछले डेढ़ साल में समन्वय और आपसी समझ का जो मंच तैयार हुआ है, उसे अब ‘समयबद्ध कार्ययोजनाओं’ में बदलना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया कि, भले ही प्रगति हुई है, लेकिन प्रदर्शन में मौजूद अंतरालों को भरने के लिए राज्यों के साथ समन्वय को और अधिक गहरा करना होगा।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी के (PACS) को सशक्त बनाना इस सम्मेलन का केंद्र बिंदु रहा। सरकार ने देशभर में दो लाख नए PACS बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। डॉ. भुटानी ने स्पष्ट किया कि जिस गति से इस अभियान की शुरुआत हुई थी, उसे बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
PACS के कंप्यूटरीकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने पिछले नौ महीनों की प्रगति की सराहना की, लेकिन साथ ही दूरदर्शी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि, असली परीक्षा मार्च 2027 के बाद होगी, जब वर्तमान योजना अवधि समाप्त हो जाएगी। राज्यों को इसे केवल एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि एक ‘स्थायी डिजिटल प्रणाली’ के रूप में अपनाना होगा। कंप्यूटरीकरण से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि PACS को Agri Stack, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और उर्वरक प्रणालियों जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से जोड़ना भी आसान होगा।
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सहकारिता क्षेत्र में ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ की समीक्षा रहा। इस सत्र में FCI, NABARD, NAFED और NCCF जैसी दिग्गज संस्थाओं ने हिस्सा लिया।
इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र इन बिंदुओं पर रहा:
1- साइट चयन और क्षमता योजना: प्रत्येक जिले की आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से भंडारण केंद्रों का निर्माण।
2- eNWR (इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रिसीप्ट): किसानों को उनकी उपज के बदले वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद करने के लिए डिजिटल रसीद प्रणाली का एकीकरण।
3- सहकारी भागीदारी: भंडारण तंत्र में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को केवल संग्रह तक सीमित न रखकर उन्हें व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा बनाना।
4- बैंकिंग सुधार और तकनीकी समावेश:
सहकारी बैंकिंग सुधारों को लेकर सम्मेलन में राज्यों से कड़ा रुख अपनाने का आग्रह किया गया। डॉ. भुटानी ने ऋण स्वीकृति में तेजी लाने और वर्तमान वित्तीय चक्र के भीतर फंड के पूर्ण उपयोग पर बल दिया। बैंकिंग सत्र में विशेष रूप से कई तकनीकी सुधारों पर चर्चा हुई।
जैसे साइबर सुरक्षा: डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे को देखते हुए सहकारी बैंकों की सुरक्षा को पुख्ता करना।
आधार सीडिंग और डोरस्टेप बैंकिंग: सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए बैंकिंग सेवाओं को घर-घर तक ले जाना।
DCCBs का सुदृढ़ीकरण: जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण प्रवाह को सुगम बनाना ताकि जमीनी स्तर पर पूंजी की कमी न हो।
भविष्य का सहकारी मॉडल केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रहेगा। सम्मेलन में निष्क्रिय पड़ी PACS को पुनर्जीवित करने और उन्हें ‘बहु-सेवा केंद्रों’ (Multi-Service Centers) में बदलने की रणनीति साझा की गई। अब एक ही छत के नीचे किसानों को बीज, उर्वरक, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की सुविधाएं, जन औषधि केंद्र, ई-वॉलेट और अन्य डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी। ये कदम PACS को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी सिद्ध होगा।
वाराणसी का ये राष्ट्रीय सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भारत का सहकारिता मंत्रालय अब ‘रिएक्टिव’ के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ भूमिका में है। डॉ. भुटानी के आह्वान ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ये स्पष्ट कर दिया है कि ‘सहकार से समृद्धि’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए एक मिशन है।
तकनीकी एकीकरण, प्रभावी भंडारण और सशक्त बैंकिंग के माध्यम से सहकारिता आंदोलन न केवल किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगा, बल्कि एक ऐसी आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण करेगा जो समावेशी, पारदर्शी और आधुनिक होगी। अब जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर है कि वे इन सुधारों को जिला स्तर तक ले जाकर धरातल पर परिणामों का रूपांतरण करें।
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