WhatsApp Image 2025 12 09 at 2.04.17 PMमध्य प्रदेश: मंत्री बागरी का मीडिया पर फुटा गुस्सा ?

मध्य प्रदेश: मंत्री बागरी का मीडिया पर फुटा गुस्सा ?

मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी उस समय सुर्खियों में आ गईं, जब मीडिया ने उनसे उनके परिवारजनों पर लगे गंभीर आरोपों से जुड़े सवाल पूछने की कोशिश की। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जैसे ही मंत्री मंच से उतरीं, पत्रकारों ने उनसे उनके भाई की कथित तौर पर 46 किलो गांजा तस्करी के मामले में गिरफ्तारी से जुड़े सवाल पूछे।

सवाल सुनते ही मंत्री  असहज दिखीं और उन्होंने नाराजगी भरे लहजे में पत्रकारों को जवाब दिया— “जबरदस्ती की बात क्यों करते हो तुम लोग?” इसके बाद उन्होंने कोई अन्य सवाल सुने बिना आगे बढ़ जाना बेहतर समझा।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भी तीव्र हो गए हैं

विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का कहना है कि, जिस तरह मंत्री ने सवालों पर प्रतिक्रिया दी, वे इस बात का संकेत है कि, सरकार और मंत्री, दोनों मामले पर स्पष्ट होने से बच रहे हैं।विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि मंत्री अपने परिवार को राजनीतिक संरक्षण दे रही हैं, जबकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है।

गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ दिन पहले ही मंत्री के बहनोई की भी बांदा में नशे से जुड़े एक अन्य प्रकरण में गिरफ्तारी हुई थी। इस घटनाक्रम ने विवाद को और गहरा कर दिया है और विपक्ष को हमले का नया आधार दे दिया है।

विपक्ष का कहना है कि, मंत्री के परिजनों के नाम कई नशा-सम्बंधित मामलों में सामने आ रहे हैं, ऐसे में मंत्री को जनता के सामने तथ्यों को स्पष्ट करना चाहिए। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि, ये मामला कानून के दायरे में है और परिवार के किसी भी सदस्य पर लगे आरोपों का राजनीतिक व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं है

उनका मानना है कि, विपक्ष जानबूझकर व्यक्तिगत मामलों को राजनीतिक रंग देकर माहौल को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। मंत्री प्रतिमा बागरी की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक विशेषज्ञों की भी नजर है। उनका कहना है कि, सार्वजनिक जीवन में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रतिक्रियाएँ बेहद सावधानी से दी जानी चाहिए, क्योंकि कैमरे और सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी वक्त की छोटी-सी घटना बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकती है।

जब किसी मंत्री के परिवार पर गंभीर आरोप लगते हैं, तब मीडिया की ओर से सवाल पूछना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में आक्रामक प्रतिक्रिया विपक्ष को मजबूत हथियार उपलब्ध करवा देती है। स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि, राज्य में नशे से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय है

जब किसी मंत्री या जनप्रतिनिधि के परिजनों का नाम ऐसे मामलों में सामने आता है, तो सरकार की छवि प्रभावित होती है। यही वजह है कि, विपक्ष इस विवाद को व्यापक स्तर पर उठाकर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर दो तरह की राय देखने को मिल रही है। एक वर्ग का मानना है कि, पत्रकारों को कार्यक्रम के बाहर ऐसे संवेदनशील सवालों को अधिक संतुलित तरीके से पूछना चाहिए था। जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि, मीडिया का काम ही सत्ता से सवाल पूछना है, और जनप्रतिनिधियों को इसका जवाब धैर्य से देना चाहिए।

इस पूरे विवाद ने न केवल मंत्री प्रतिमा बागरी को राजनीतिक घेरे में ला दिया है, बल्कि शासन और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी को भी और उभार दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या मंत्री इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान देंगी या फिर सरकार की तरफ से कोई सफाई सामने आएगी। फिलहाल इतना तय है कि खजुराहो की यह छोटी-सी घटना प्रदेश की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर चुकी है

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