WhatsApp Image 2025 12 12 at 2.33.02 PMमध्य प्रदेश: सिंधिया-टूरिज्म-BJP विवाद से आया MP में सियासी भूचाल !

मध्य प्रदेश: सिंधिया-टूरिज्म-BJP विवाद से आया MP में सियासी भूचाल !

 

मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। तीन अलग-अलग घटनाओं ने पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल को गरमाए रखा—पहली, ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा मंच पर मंत्रियों को सम्मान देते हुए पगड़ी पहनाने का दृश्य; दूसरी, एमपी टूरिज्म की विवादित रील; और तीसरी, दमोह के हटा क्षेत्र से BJP विधायक द्वारा अपनी ही सरकार के मंत्रियों की शिकायत।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। मंच पर मौजूद अतिथि और विश्वविद्यालय स्टाफ पारंपरिक पगड़ी में नजर आए, लेकिन मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और एदल सिंह कंसाना बिना पगड़ी के थे

सिंधिया ने यह देखा तो तुरंत दो पगड़ियाँ मंगवाईं और खुद अपने हाथों से दोनों मंत्रियों को पहनाईं। यह दृश्य देखकर सभागार तालियों से गूंज उठा। इसके बाद दोनों मंत्रियों के साथ सिंधिया ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाया।
इस घटना पर लोगों की प्रतिक्रिया भी दिलचस्प रही। सोशल मीडिया पर कई लोग लिख रहे हैं कि जब सिंधिया ने कांग्रेस से बीजेपी में “पाला बदला” था, तब यही नेता उनके साथ मजबूती से खड़े रहे थे

ऐसे में, “महाराज का सम्मान लौटाना बनता है।” दूसरी ओर, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग एक रील के कारण आलोचना के घेरे में आ गया। विभाग ने स्काई डाइविंग का प्रचार करते हुए एक प्रोमो रील बनाई, जिसके बैकग्राउंड में बॉलीवुड गाना लगाया गया— “सूरज डूबा है यारों… दो घूंट नशे के मारो…”

लोगों ने इस पंक्ति को “नशे को प्रोत्साहित करने वाला कंटेंट” बताते हुए रील का विरोध शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर आलोचना बढ़ने के बाद MP टूरिज्म बैकफुट पर आ गया और रील से गाना हटाकर साधारण म्यूजिक लगा दिया।
हालांकि, तब तक सरकार की किरकिरी हो चुकी थी। लोग सवाल उठा रहे थे कि एक तरफ सरकार नशा मुक्ति की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके विभाग की रील में नशे का संदेश जा रहा है।

कई लोगों ने व्यंग्य में लिखा—“अपना एमपी अजब है, गजब है।” तीसरी बड़ी खबर दमोह जिले के हटा विधानसभा क्षेत्र से आई, जहाँ भाजपा विधायक उमा देवी खटीक ने अपनी ही पार्टी की सरकार के मंत्रियों के खिलाफ शिकायत की है। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन आरोप लगाया कि दो मंत्री उनके क्षेत्र में अनावश्यक दखल दे रहे हैं

जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार से शिकायत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो “मंत्री यहीं ऑफिस खोलकर बैठ जाएँ, और मुझे इस्तीफा देना पड़ेगा।” यह बयान सुनकर बैठक का माहौल असहज हो गया।
मंत्री इंदर सिंह परमार ने मामला संभालते हुए कहा कि यह “घर का मुद्दा” है और इसे बातचीत से सुलझा लिया जाएगा।

हालाँकि, विधायक ने किसी मंत्री का नाम नहीं लिया था, लेकिन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि वह किसी के काम में दखल नहीं देते। उनका बयान आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ और तेज हो गईं।
सोशल मीडिया पर लोग तंज कसने लगे— “बीजेपी हमेशा कांग्रेस पर गुटबाज़ी का आरोप लगाती है, लेकिन दमोह का मामला बताता है कि अंदरूनी कलह यहाँ भी कम नहीं।”

जहाँ सिंधिया का मंत्रियों को पगड़ी पहनाना “समर्थकों के सम्मान” का संदेश माना गया, वहीं टूरिज्म रील ने सरकार को असहज स्थिति में ला दिया। दमोह की अंदरूनी खींचतान ने यह भी साफ कर दिया कि भाजपा में सब कुछ उतना शांत नहीं, जितना दिखता है।कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की राजनीति को तीन अलग-अलग मुद्दों के कारण चर्चा में रही—सम्मान, विवाद और अंदरूनी कलह—तीनों ने जनता और सोशल मीडिया का खूब ध्यान खींचा

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