गुरुवार को अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर प्लेन क्रैश की खबर ने एक बार फिर देश के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक — चरखी दादरी प्लेन क्रैश (1996) — की दर्दनाक यादें ताजा कर दीं। हरियाणा के चरखी दादरी में 12 नवंबर 1996 को दो विमानों की हवा में टक्कर में 349 लोगों की मौत हो गई थी, जो भारत के विमान इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है। दरअसल शाम को करीब 6:30 बजे थे। जब चरखी दादरी के टिकाण गांव के ऊपर अचानक आसमान में ज़ोरदार आवाज़ और रोशनी दिखी। जिसमें दो अंतरराष्ट्रीय विमान—सऊदी अरब एयरलाइंस का बोइंग 747 और कजाकिस्तान एयरलाइंस का Ilyushin II-76—हवा में ही टकरा गए। कुछ ही सेकंड में दोनों विमान आग के गोले बनकर खेतों में गिर पड़े। स्थानीय लोगों के मुताबिक आग के गोले आसमान से गिरने लगे। लोग घबराकर घरों से निकल पड़े और खेतों की तरफ भागे। चारों तरफ सिर्फ लाशें और जलते हुए मलबे का ढेर था।
पायलट की लापरवाही से हुआ हादसा
एक किसान ने बताया कि हादसे के बाद उनके खेत वर्षों तक बंजर पड़े रहे। “मलबा हटने और शवों को ले जाने के बावजूद खेतों में कदम रखने से डर लगता था। ऐसा मंज़र पहले कभी नहीं देखा। घटना के तुरंत बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और हरियाणा के मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल मौके पर पहुंचे। चरखी दादरी में स्मारक और अस्पताल बनाने की घोषणा हुई थी। हालांकि सऊदी संस्था द्वारा बनाया गया अस्थायी अस्पताल कुछ वर्षों बाद बंद कर दिया गया। इस त्रासदी की जांच दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस आरसी लाहोटी की अध्यक्षता में की गई। रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के लिए कजाकिस्तान एयरलाइंस के पायलट की चूक को ज़िम्मेदार ठहराया गया। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने कजाकिस्तान विमान को 15,000 फीट और सऊदी विमान को 14,000 फीट पर उड़ान जारी रखने के निर्देश दिए थे। लेकिन कजाकिस्तानी विमान तय ऊंचाई से नीचे उतर गया और पीछे से सऊदी विमान से टकरा गया।
चरखी दादरी के लोगों के जख्म फिर हरे हो गए
जांच में साफ हो गया कि न तो एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की गलती थी और न ही किसी तकनीकी उपकरण की। बल्कि पायलट निर्देशों को समझ नहीं पाया, और एयर कॉरिडोर की कमी के कारण दो जहाज एक ही रूट पर बेहद करीब आ गए। आज जब अहमदाबाद में प्लेन क्रैश की खबर आई, तो चरखी दादरी के लोगों के जख्म फिर हरे हो गए। मीडिया कर्मी दयानंद प्रधान, जो हादसे के वक्त सबसे पहले मौके पर पहुंचे थे, बताते हैं, “चारों तरफ बस लाशें ही थीं। आज भी वह मंजर आंखों से नहीं हटता।” 29 साल बीतने के बाद भी कई सवाल जस के तस हैं—क्या हमने उस हादसे से कुछ सीखा? क्या एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और पायलट ट्रेनिंग में सुधार हुआ? अहमदाबाद क्रैश की जांच रिपोर्ट इन सवालों का जवाब दे सकेगी या नहीं, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन चरखी दादरी के लोग आज भी उस शाम को नहीं भूल सके हैं, जब आसमान से मौत बरसी थी।
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