Manohar Lal: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किया मां को याद
चलती फिरती हुई आंखों से अजां देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है, मां देखी है
मां… जी हां, कहते हैं इस शब्द में पूरी दुनिया बसी है, क्योंकि, मां ही है जो, घनी दोपहरी में अपनी औलाद के लिए अपने आंचल से छांव करती है, अपने बच्चे को सुखे में सुलाकर खुद गिले में सोती है। और इस दुनिया में कोई भी ऐसा इंसान नहीं होगा, जो मां की अहमियत ना जानता होगा
और इसी कथन को आज केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक बार फिर से दौहरा दिया, मौका था लोकमाता अहिल्या होलकर महिला सम्मान समारोह का जहां उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी न किसी एक महिला का हाथ होता है। और वो महिला कोई भी हो सकती है, पत्नी, बहन, मां, दादी, नानी कोई भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि, वो आज जिस स्थान पर पहुंचे हैं, उसका श्रय उनकी माता जी को जाता है।
वहीं, उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि, कैसे उन्होंने दसवीं पास की और उनके पिता जी ने उन्हें आगे पढ़ने के लिए मना कर दिया और खेती के काम में हाथ बटाने के लिए कहा। लेकिन, उन्होंने आगे पढ़ाई करने के लिए जिद पकड़े रही और उनकी माता जी ने उन्हें आगे पढ़ने के लिए 300 रुपये दिए, जिसकी वजह से आगे की पढ़ाई पूरी हुई।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि, अगर उस समय कॉलेज में पढ़ने की व्यवस्था ना होती, तो समान्य व्यक्तियों के तरह जीवन गुजरता, लेकिन आगे की पढ़ाई पूरी करने की वजह से कॉलेज जाना हुआ, शहर में जाना हुआ, लोगों से मिलना हुआ और आज इस स्थान पर पहुंचना हुआ। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन के दौरान जिस तरह अपनी माता जी को सम्मान दिया है, वो हर किसी को प्रेरणा देने के लिए काफी है।
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