महाराष्ट्र और झारखंड में भले ही दोनों पार्टियों ने अपने-अपने राज्यों में सत्ता पर कब्जा जमा लिया हो लेकिन चुनाव के दौरान किए गए वादे इन दोनों राज्यों की फाइनेंशियल हेल्थ बिगाड़ने वाले साबित हो सकते हैं। दरअसल सत्ता पर वापसी के लिए महाराष्ट्र में महायुति ने वहां की जनता से खूब भर भर के वादे किए। उधर झारखंड में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की सरकार ने वहां के लोगों के सामने वादों का पिटारा खोला। वहीं अब जब सत्ता में दोनों ने वापसी की है तो दोनों सरकारों पर वादों को पूरा करने का दबाव होगा।
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