जानिए क्यों लोग छोड़ रहे इस्लाम? दुनिया भर में क्यों बढ़ रही Ex-Muslim आबादी, भारत के केरल में भी Ex-Muslim संगठन

इन दिनों इस्लाम छोड़ने का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ रहा है। जो लोग इस्लाम छोड़ रहे हैं उनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। उनका कहना है कि इस्लाम में कुछ चीजें ठीक नहीं हैं ऐसे में हम उस मजहब का पालन नहीं कर सकते। बता दें कि ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और इंडोनेशिया समेत दुनिया भर के तमाम देश इस्लामिक बहुल हैं। इसके बाद भी एक वर्ग ऐसा है, जो मुस्लिम मजहब ही छोड़ रहा है। ऐसे लोगों ने एक्स-मुस्लिम नाम का आंदोलन भी शुरू किया है। भारत के केरल में यह आंदोलन अस्तित्व में है। इसके अलावा ब्रिटेन, अमेरिका समेत दुनिया के कई अन्य देशों में भी ऐसे ऐक्टिविस्ट हैं। ये एक वैश्विक सामाजिक और बौद्धिक आंदोलन है, जिसमें ऐसे लोग शामिल हैं जो इस्लाम छोड़ चुके हैं और सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान ‘पूर्व-मुसलमान’ या Ex-Muslim के रूप में घोषित करते हैं। ये आंदोलन 2000 के दशक में संगठित रूप में उभरकर सामने आया। हालांकि इस्लाम छोड़ने वाले लोग पहले भी मौजूद थे।

अमेरिका में सबसे ज्यादा Ex-Muslim

2018 में प्रकाशित प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका में रहने वाले 23 प्रतिशत वयस्क जो मुस्लिम परिवार में बड़े हुए, अब अपनी पहचान मुसलमान के रूप में नहीं बताते हैं। इस्लाम छोड़ने वालों में 7 फीसदी लोगों ने बताया कि वे इसकी शिक्षाओं से सहमत नहीं थे। एंग्लिकन इंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 55 प्रतिशत पूर्व-मुसलमान नास्तिक बन जाते हैं, लगभग 25 प्रतिशत ईसाई बन जाते हैं जबकि अन्य 10 प्रतिशत के बारे में पता नहीं चलता है। बीबीसी ने 2015 में अपनी पड़ताल में पाया था कि ब्रिटेन में इस्लाम छोड़ने वालों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। इसमें सिर्फ समाज ही नहीं बल्कि अपने ही परिवार के लोग भी शामिल होते हैं। ऐसे में इन पूर्व मुस्लिमों का खुलकर सामने आना ऐसे लोगों को हिम्मत देता है। यूरोप के सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश फ्रांस में 15000, जबकि अमेरिका में एक लाख मुसलमान हर साल धर्म छोड़ देते हैं।

भारत के केरल में भी Ex-Muslim संगठन

अमेरिका और यूरोप का फलसफा बढ़ते-बढ़ते दुनिया के कई देशों में फैल गया। अब भारत के केरल में भी एक्स-मुस्लिम समुदाय है। ये पहचान गुप्त रखकर काम नहीं करते, बल्कि बाकायदा एक संगठन बना रखा है। जिसका नाम ही एक्स-मुस्लिम्स ऑफ केरल (EMU) है।  ये संगठन लगभग पांच साल पहले उनके लिए बना, जो इस्लाम छोड़ चुके थे। केरल में अक्सर उन्हें धमकियां मिलतीं, या कई दूसरी परेशानियां आती थीं। ऐसे में एक सपोर्ट सिस्टम के लिए EMU बना। इसके अलावा भी एक ग्रुप है, जिसका नाम नॉन-रिलीजियस सिटिजन्स है।  ये केवल इस्लाम को छोड़ने वाले या उससे नफरत करने वाले नहीं, बल्कि वे लोग हैं जो किसी भी धर्म को नहीं मानते। वे कहते हैं कि 18 साल का होने के बाद भी किसी को धर्म के बारे में बताया जाना चाहिए।

Ex-Muslim को लगातार मिलती हैं धमकियां

बतां दें कि इस धर्म को छोड़ने वालों को कथित तौर पर मौत की धमकियां मिलती हैं. साल 2016 में इसपर एक डॉक्युमेंट्री भी बनी- इस्लाम्स नॉन-बिलीवर्स. नॉर्वे में बनी इस फिल्म में एक्स-मुस्लिमों के डर और खतरों पर बात की गई कि किस तरह उन्हें चरमपंथियों की धमकियां मिलती हैं। या परिवार को मारने की धमकी मिलती है. ऐसे में एक्स-मुस्लिम्स ने एक काम ये किया कि वे अपने जैसी सोच वालों को जोड़ने लगे।

Rupesh Jha

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