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कांग्रेस का ‘सुपर सिक्स प्लान’… सरकार को संसद में घेरने के लिए बनाई ये रणनीति

कांग्रेस ने संसद में सरकार को घेरने का बड़ा प्लान तैयार किया है. इसके लिए 6 मुद्दों पर उसका फोकस है. इसमें नई शिक्षा नीति, सदन में विपक्ष की आवाज और वक्फ संशोधन बिल के साथ ही अन्य 3 मुद्दे हैं, जिनको लेकर कांग्रेस मोदी सरकार को घेरेगी. कांग्रेस की इस लिस्ट में पहला मामला सदन में विपक्ष की आवाज से जुड़ा है. कांग्रेस इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाएगी. आइए जानते हैं कांग्रेस की पूरी रणनीति.
कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा और राज्यसभा में नेता विपक्ष की आवाज क्यों दबाई जा रही है, उनको बोलने का उचित मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है? इसको लेकर वो संसद में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेगी. इसके साथ ही नई शिक्षा नीति पर सोनिया गांधी के सवाल खड़ा करने वाले लेख पर सरकार से सवाल करेगी. कांग्रेस आर्टिकल 15(5) का भी मुद्दा उठाएगी.

11 साल से मोदी सरकार इसे इग्नोर कर रही: कांग्रेस

कांग्रेस का कहना है कि साल 2006 में संविधान संशोधन के जरिये आर्टिकल 15(5) को उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण दिया गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी संविधान के मूल आत्मा से छेड़छाड़ नहीं माना है. फिर भी पिछले 11 साल से मोदी सरकार इसे इग्नोर कर रही है. इसके जरिए कांग्रेस आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी है. एक अन्य मुद्दा वक्फ संशोधन बिल का है.

मणिपुर, नागालैंड अरुणांचल का मुद्दा

इसे लेकर कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ मिलकर विरोध की रणनीति, साथ ही सहयोगी जेडीयू, टीडीपी और एलजेपी को घेरने की विशेष रणनीति बनाने पर विचार कर रही है. साथ ही कांग्रेस देश में हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई पैदा करने का आरोप लगाकर भी सरकार को सदन में घेरने की तैयारी में है. कांग्रेस की अटैकिंग लिस्ट में मणिपुर, नागालैंड अरुणांचल का मुद्दा है. इसे लेकर वो इन राज्यों को 6 महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित करने और AFSPA लगाने पर सरकार से सवाल करेगी.

सोनिया गांधी ने क्या कहा है?

बता दें कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार की शिक्षा नीति सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार का मेन एजेंडा सत्ता का केंद्रीकरण, शिक्षा का कमर्शियलाइजेशन और किताबों का सांप्रदायिकरण है. एक लेख में उन्होंने कहा कि ये तीन C देश की भारतीय शिक्षा को परेशान कर रहे हैं. देश के एजुकेशन सिस्टम पर ये प्रहार बंद होने चाहिए.

सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा है कि पिछले 11 साल में इस सरकार की पहचान अनियंत्रित केंद्रीकरण के रूप में रही है. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान देश के एजुकेशन सिस्टम को हुआ है. केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक सितंबर 2019 से नहीं बुलाई गई है. इसमें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के शिक्षा मंत्री शामिल हैं. एनईपी-2020 से शिक्षा में बड़े बदलाव करने और इसे लागू करते समय भी सरकार ने राज्य सरकारों से बात करना उचित नहीं समझा.

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