जोधपुर: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की समीक्षा,अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को लेकर हुई बैठक,इस समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए गए,“प्रदेश के 19 जिलों में बनेगी अरावली की ग्रीन वॉल”,“ग्रीन वॉल बनने से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार”

“ग्रीन वॉल बनने से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार”

“प्रदेश के 19 जिलों में बनेगी अरावली की ग्रीन वॉल”

इस समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए गए

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को लेकर हुई बैठक

जोधपुर: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने की समीक्षा

देश की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक अरावली को डिग्रेडेशन से बचाने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोधपुर के आफरी (AFRI) में वैज्ञानिकों और वन विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। ये बैठक इस प्रोजेक्ट पर उदयपुर के बाद दूसरी समीक्षा बैठक थी।

केंद्रीय मंत्री ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि, आफरी के वैज्ञानिक लैब में विकसित किए गए वनस्पति बीजों और प्रजातियों को अब अरावली क्षेत्र में व्यावहारिक रूप से प्रयोग में लाएं, जिससे परियोजना को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि इस ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए स्थानीय जलवायु के अनुकूल वन प्रजातियों का चयन किया जाना बेहद जरूरी है।

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का उद्देश्य गुजरात के पोरबंदर से लेकर हरियाणा के पानीपत तक लगभग 1400 किलोमीटर लंबी और 5 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी तैयार करना है। इस परियोजना में राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली के कुल 29 जिले शामिल हैं, जिनमें से सर्वाधिक 19 जिले राजस्थान से हैं। ये प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार देने में भी सहायक साबित होगा।

विशेष जानकारी के अनुसार, उदयपुर जिले में अरावली पर्वतमाला में सर्वाधिक डिग्रेडेशन हुआ है- यहां की स्थिति गुजरात, हरियाणा और दिल्ली से भी अधिक चिंताजनक है। परियोजना के माध्यम से केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश की 26 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि को पुनर्जीवित किया जाए।

भूपेंद्र यादव ने वैज्ञानिकों से कहा कि, वे अरावली रिस्टोरेशन पर फोकस करते हुए वनस्पति की नई किस्मों और जलवायु-उपयुक्त बीजों का विकास करें, जिससे इस इलाके में दीर्घकालिक और टिकाऊ हरित पट्टी बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि, ये बीज भविष्य में पर्यावरणीय संकट से निपटने में सहायक होंगे।  इस परियोजना से विभिन्न लाभ मिल सकते हैं और भविष्य में भी पर्यावरणीय संकट से बचा जा सकता है और जो लाभ है वो है

  • थार रेगिस्तान के विस्तार पर प्रभावी रोक लगेगी।

  • जैव विविधता में वृद्धि होगी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ होगा।

  • कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण में मदद मिलेगी, जिससे जलवायु परिवर्तन के असर को कम किया जा सकेगा।

  • स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर प्राप्त होंगे।

  • जल संरक्षण में मदद मिलेगी और सतही जल स्रोतों की स्थिति बेहतर होगी।

वही प्रेस वार्ता के दौरान भूपेंद्र यादव ने अरावली प्रोजेक्ट के साथ-साथ जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विषय पर सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करती रही है। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां की जातिगत जनगणना को लेकर भी कांग्रेस ने केवल राजनीति और भ्रम फैलाने का कार्य किया है।

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