विवेक झा, भोपाल। आयकर रिटर्न (ITR) और टीडीएस (TDS) विवरणी जमा करने की अंतिम तिथि पर देशभर के करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। आयकर पोर्टल पर टैक्स चालान (Challan) जमा करने की प्रक्रिया बाधित होने से कई करदाता समय पर अपना कर भुगतान और आयकर विवरणी दाखिल नहीं कर सके। स्थिति यह रही कि अनेक मामलों में बैंक खाते से राशि कटने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिससे आयकर रिटर्न और टीडीएस विवरणी दाखिल करने में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो गईं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश जैन ने बताया कि यह समस्या केवल शुक्रवार सुबह ही नहीं, बल्कि गुरुवार देर रात से ही बनी हुई थी। तकनीकी गड़बड़ी के कारण करदाताओं, उद्योगों और टैक्स प्रोफेशनल्स को अंतिम समय में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
31 जुलाई आयकर रिटर्न दाखिल करने की महत्वपूर्ण तिथि होने के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की TDS विवरणी दाखिल करने की भी अंतिम तिथि थी। स्वाभाविक रूप से बड़ी संख्या में करदाता और कर सलाहकार पोर्टल पर सक्रिय थे।
इसी दौरान आयकर चालान जमा करने की ऑनलाइन प्रक्रिया प्रभावित हो गई। कई उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की कि बैंक खाते से राशि डेबिट होने के बाद भी चालान जनरेट नहीं हो रहा था और भुगतान की पुष्टि नहीं मिल रही थी। इसके कारण आगे की रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया भी रुक गई।
सीए राजेश जैन ने कहा कि देश का जिम्मेदार करदाता अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहता है। प्रत्येक नागरिक समय पर कर भुगतान और आयकर विवरणी दाखिल करने का प्रयास करता है, लेकिन यदि अंतिम समय पर सरकारी प्रणाली ही तकनीकी रूप से काम नहीं करे तो करदाताओं के सामने असहाय स्थिति बन जाती है।
उन्होंने कहा कि जब बैंक खाते से राशि कट जाती है और पोर्टल भुगतान स्वीकार नहीं करता, तब करदाता आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानी का सामना करता है।
तकनीकी समस्या का असर केवल व्यक्तिगत करदाताओं तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स कंसल्टेंट, कंपनियां और उद्योग समूह भी प्रभावित हुए। अंतिम तिथि होने के कारण एक साथ हजारों रिटर्न और टीडीएस विवरणियां दाखिल की जानी थीं, लेकिन पोर्टल पर भुगतान संबंधी बाधा के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती रही।
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम दिनों में पोर्टल पर अधिक लोड आने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। ऐसे में आवश्यक है कि आयकर विभाग समय रहते तकनीकी क्षमता बढ़ाए, ताकि करदाताओं को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
कर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो प्रभावित करदाताओं को राहत देने के लिए आयकर विभाग को समय-सीमा बढ़ाने अथवा विलंब शुल्क और ब्याज से राहत देने पर विचार करना चाहिए।
उनका कहना है कि जब समस्या करदाता की नहीं बल्कि सरकारी पोर्टल की तकनीकी व्यवस्था की हो, तब उसका खामियाजा करदाताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार आयकर विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल टैक्स व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन अंतिम तिथियों पर बार-बार सामने आने वाली तकनीकी समस्याएं इस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि आयकर पोर्टल की सर्वर क्षमता बढ़ाने, भुगतान प्रणाली को अधिक स्थिर बनाने तथा रियल-टाइम तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में करदाताओं को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
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