‘इंटरनेशनल बेइज्जती होती है’ गुरुग्राम में जलभराव पर भड़के केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह

 CHANNEL 4 NEWS INDIA


हरियाणा के गुरुग्राम शहर में मानसून के दौरान हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है। नालियों की सफाई ठीक से नहीं होती, पानी की निकासी के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जाते और हर साल की तरह बारिश शुरू होते ही शहर का बुरा हाल हो जाता है। इस बार इस लापरवाही पर केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी के चलते बुधवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई बैठक में उन्होंने लापरवहा अधिकारियों की खामियों को लेकर जमकर फटकार लगाई और कहा कि गुरुग्राम इंटरनेशनल लेवल का शहर है। यहां जलभराव जैसी समस्या से शहर की देश-विदेश में बदनामी हो रही है, जो किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हर साल यही समस्या, समाधान क्यों नहीं? 

राव इंद्रजीत ने पूछा कि जब हर साल यही समस्या सामने आती है तो समाधान क्यों नहीं किया गया? योजनाएं तो हर साल बनती हैं लेकिन नतीजे क्यों नहीं दिखते? उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी लंबे समय तक एक ही पद पर नहीं टिकता, जिससे हर बार नई टीम आती है और पुराने प्रोजेक्टों की समझ नहीं होती। इससे काम अधूरा रह जाता है और जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती।

‘सभी को जवाबदेह भी बनाया जाएगा..कोई बहाना नहीं चलेगा’

राव इंद्रजीत ने कहा कि जो नए अधिकारी नियुक्त हुए हैं, उन्हें 6 महीने का समय दिया गया है, लेकिन अब सभी को जवाबदेह भी बनाया जाएगा। कोई बहाना नहीं चलेगा। उन्होंने खासतौर पर नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और नई योजना के क्रियान्वयन पर तत्काल ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल तात्कालिक समाधान न खोजें, बल्कि 10 से 20 साल तक की लंबी योजना बनाएं ताकि आने वाले वर्षों में भी शहर जलभराव जैसी समस्याओं से मुक्त हो सके।  इस मौके पर गुरुग्राम के डीसी अजय कुमार ने बताया कि हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक 2.3 किलोमीटर लंबी मास्टर ड्रेन बनाने के लिए 15.57 करोड़ का एस्टीमेट तैयार कर एनएचएआई को भेजा गया है। इस बार नरसिंहपुर पॉइंट पर भी नए पंप लगाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बारिश का पानी बेकार जाने की बजाय झीलों और तालाबों से जोड़ा जाए, जिससे जलभराव भी न हो और भूजल भी रिचार्ज हो सके।

किसानों के हितों की अनदेखी न हो: राव इंद्रजीत सिंह

नजफगढ़ ड्रेन के सुधार को लेकर पर्यावरणीय और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी न हो। जहां-जहां नाले बनाए जाएं, वहां स्थानीय किसानों से बातचीत करके समाधान निकाला जाए। गौरतलब है कि गुरुग्राम में हर साल जलभराव की समस्या अब सरकार के लिए सिरदर्द बन चुकी है। इस बार यदि मानसून से पहले तैयारी पूरी नहीं हुई, तो सरकार सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी। राव इंद्रजीत सिंह का साफ संदेश है कि अब सिर्फ बैठक नहीं, जमीन पर परिणाम दिखना जरूरी है।

 

Rupesh Jha

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