ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के मेजर जनरल मोहसिन रेजाई ने कहा है कि फिलहाल जहाजों की आवाजाही के लिए स्ट्रेट के बीच से एक सीमित और अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका के अगले कदमों और दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।
रेजाई के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का एक हिस्सा ईरान के समुद्री क्षेत्र में आता है, जबकि दूसरा हिस्सा ओमान के समुद्री क्षेत्र में है। दोनों देश मिलकर इस अहम समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही को संभालते हैं।
मोहसिन रेजाई ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच में एक नया समुद्री कॉरिडोर तय किया गया है। इस रास्ते से सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अभी अस्थायी है। भविष्य में जहाजों की आवाजाही किस तरह होगी और स्ट्रेट को पूरी तरह कब खोला जाएगा, इसका फैसला अमेरिका के साथ बातचीत के नतीजे पर निर्भर करेगा।
रेजाई ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के सामने कुछ अहम शर्तें रखी हैं। इनमें पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करना सबसे प्रमुख मुद्दा है। ईरान की मांगों में गाजा और लेबनान में युद्ध रोकना, लेबनानी इलाकों से इजरायली सेना की वापसी और सीरिया पर हमले बंद करना शामिल है। रेजाई ने कहा कि अमेरिका को पहले यह साबित करना होगा कि वह इन मुद्दों पर गंभीर है। उनके मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच अभी भरोसे की भारी कमी है।
ईरानी जनरल ने अमेरिका को आर्थिक दबाव बढ़ाने को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर वॉशिंगटन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता है तो तेहरान भी क्षेत्र में अमेरिकी आर्थिक हितों के खिलाफ जवाबी कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर दोबारा संघर्ष शुरू हुआ तो उसका जवाब पहले से अलग और ज्यादा मजबूत हो सकता है।
मोहसिन रेजाई ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी कड़ी चेतावनी दी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान की ओर से आगे किस तरह के कदम उठाए जाएंगे। रेजाई ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मुद्दा पश्चिम एशिया की बाकी घटनाओं से अलग नहीं है। उनके मुताबिक, गाजा, लेबनान, सीरिया और क्षेत्र के दूसरे देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामानों की आवाजाही होती है। यही वजह है कि यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। ऐसे में ईरान का यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच काफी अहम माना जा रहा है।
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