मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने का फैसला ले लिया है। इससे पहले ईरान ने इस रास्ते को खोलने की बात कही थी, लेकिन अब उसने अपना फैसला बदल दिया है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब अमेरिका ने साफ कहा कि ईरान के इस फैसले से उसकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं होगी। दरअसल, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद से ही इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमांड ने कहा है कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और वहां सख्त निगरानी रखी जा रही है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखेगा, तब तक इस रास्ते से जहाजों को गुजरने नहीं दिया जाएगा।
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिका की नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं करता।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तनाव का असर समुद्री यातायात पर भी पड़ा है। कई भारतीय तेल टैंकर, जो पर्शियन गल्फ से होर्मुज की ओर जा रहे थे, उन्हें बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। इनमें “सन्मार हेराल्ड”, “देश गरिमा”, “देश वैभव” और “देश विभोर” जैसे जहाज शामिल हैं, जो अब ईरान के क़ेश्म आइलैंड के आसपास देखे गए हैं।
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि जहाजों ने अचानक यू-टर्न क्यों लिया, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा कारणों और बढ़ते तनाव की वजह से ऐसा हुआ।
कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी दिखने लगा है, जिससे आने वाले समय में तेल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
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