दौसा: राजस्थान के दौसा जिले में कलेक्टर डॉ. सौम्या झा की एक अनूठी पहल प्रशासनिक कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की नई मिसाल बन रही है। पंचायत चुनाव के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की परेशानियां दूर करने के लिए तैयार किया गया ‘दौसा बॉट’ अब चर्चा में है। इस AI आधारित डिजिटल सहायक की खासियत यह है कि यह दिन हो या रात, चुनावी ड्यूटी से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए उपलब्ध रहता है। यहां तक कि रात 3 बजे भी कर्मचारियों को इसके जरिए जरूरी जानकारी मिली।
इस तकनीक की मदद से कर्मचारियों को चुनावी नियमों, सरकारी आदेशों और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के जवाब का इंतजार नहीं करना पड़ता। व्हाट्सएप पर सवाल पूछते ही कुछ ही सेकंड में संबंधित जानकारी उपलब्ध हो जाती है।
683 कर्मचारियों ने पूछे 8,643 सवाल
दौसा जिला प्रशासन के इस नवाचार की उपयोगिता सामने आए आंकड़ों से समझी जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 12 अक्टूबर से 3 नवंबर तक 683 अधिकारी और कर्मचारी इस AI बॉट का इस्तेमाल कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कुल 8,643 सवाल पूछे, जिनके जवाब डिजिटल सिस्टम के जरिए उपलब्ध कराए गए।
सबसे ज्यादा सक्रियता 29 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया के दौरान देखने को मिली। उस दिन अकेले इस बॉट ने 1,408 सवालों के जवाब दिए। आंकड़ों के मुताबिक, करीब आधे सवालों के जवाब महज 35 सेकंड में मिल गए।
दिलचस्प बात यह है कि लगभग 10 प्रतिशत सवालों के जवाब रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच दिए गए। इससे साफ है कि चुनावी ड्यूटी में देर रात काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो रही है।
व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते ही मिलता है जवाब
‘दौसा बॉट’ को इस तरह तैयार किया गया है कि कर्मचारियों को इसके इस्तेमाल के लिए किसी विशेष तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं पड़ती। न ही कोई अलग मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करना होता है।
कर्मचारी सामान्य व्हाट्सएप चैट की तरह अपने सवाल भेज सकते हैं। बॉट निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों, आधिकारिक आदेशों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है।
पंचायत चुनाव में कर्मचारियों को नामांकन, मतदान प्रक्रिया, जरूरी प्रपत्रों और प्रशासनिक नियमों से जुड़े कई सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह डिजिटल सहायक तत्काल मार्गदर्शन देने का माध्यम बन गया है।
बोलकर भी पूछ सकते हैं सवाल, 1,801 दस्तावेज कराए उपलब्ध
इस AI मॉडल की एक और खासियत इसका वॉइस नोट फीचर है। यदि किसी कर्मचारी को सवाल टाइप करने में परेशानी होती है, तो वह आवाज के माध्यम से भी जानकारी मांग सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 495 सवाल वॉइस नोट के जरिए पूछे गए हैं। इसके अलावा बॉट ने कर्मचारियों को 1,801 जरूरी प्रपत्र और आधिकारिक पत्र भी उपलब्ध कराए हैं।
इससे चुनावी कर्मचारियों को अलग-अलग फाइलों में दस्तावेज खोजने की जरूरत कम हुई है। साथ ही आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हुई है।
कलेक्टर सौम्या झा की पहल से चुनावी कामकाज हुआ आसान
दौसा की जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर डॉ. सौम्या झा ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों को होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस डिजिटल व्यवस्था की पहल की।
आमतौर पर चुनाव से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन मतदान या नामांकन के दौरान किसी विशेष नियम को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है या संबंधित आदेश तलाशने होते हैं।
‘दौसा बॉट’ इसी समस्या को कम करने का प्रयास है। यह कर्मचारियों को उपलब्ध आधिकारिक जानकारी तक तेजी से पहुंच प्रदान करता है। हालांकि, किसी नियम की अंतिम व्याख्या या विवादित मामले में सक्षम निर्वाचन अधिकारी के निर्देश ही महत्वपूर्ण रहेंगे।
तीसरे चरण के पंचायत चुनाव में भी मिलेगा लाभ
दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में उपयोगी साबित होने के बाद अब तीसरे चरण में भी इस डिजिटल सहायक का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे कर्मचारियों को समय पर जरूरी जानकारी मिलने के साथ चुनावी कामकाज में बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
दौसा का यह प्रयोग दूसरे जिलों के लिए भी उपयोगी मॉडल बन सकता है। यदि भविष्य में अन्य जिलों में इसी तरह की व्यवस्था लागू होती है, तो चुनाव प्रबंधन के साथ प्रशासनिक प्रशिक्षण और दस्तावेजों तक पहुंच को भी आसान बनाया जा सकता है।
सरकारी कामकाज में AI के इस्तेमाल की नई मिसाल
कलेक्टर डॉ. सौम्या झा की यह पहल दिखाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग केवल निजी कंपनियों या तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। सरकारी प्रशासन में भी इसका इस्तेमाल कर्मचारियों का समय बचाने और जरूरी जानकारी तेजी से उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है।
रात 3 बजे भी सक्रिय रहने वाला ‘दौसा बॉट’ इस बात का उदाहरण है कि सही योजना और आधिकारिक सूचनाओं के साथ AI तकनीक प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
