तीन हार के बाद टूटने लगा हुड्डा का खेमा!
हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस के भीतर उथल-पुथल तेज होती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाले खेमे में धीरे-धीरे निराशा बढ़ती जा रही है। हाल ही में करनाल में हुए कार्यक्रमों में ये साफ नजर आया, जब पूर्व डिप्टी स्पीकर कुलदीप शर्मा कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा के साथ दिखाई दिए।
इस कदम ने कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।
कुलदीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि, वे किसी व्यक्तिगत नेता के पीछे नहीं बल्कि पार्टी के साथ रहेंगे। उनके इस रुख ने हुड्डा खेमे के नेताओं में हलचल पैदा कर दी है। कुलदीप शर्मा का ये कदम पार्टी के भीतर नाराज नेताओं के बढ़ते समर्थन का संकेत भी माना जा रहा है।
हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश ने कुलदीप के कदम पर कड़ा रुख अपनाया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, ये लोग अपने कर्मों पर हताश हैं। उन्होंने याद दिलाया कि, कुलदीप शर्मा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बुरी हालत का सामना किया है। ऐसे में ये हुड्डा पर निशाना साधना सही नहीं है। जेपी ने कहा, “मैं ऐसे लोगों पर ध्यान ही नहीं देता।”
कुलदीप शर्मा के हुड्डा से दूरी बनाने के पीछे कई कारण हैं। जिनमें बेटे को टिकट नहीं मिला दरअसल 2024 के लोकसभा चुनाव में कुलदीप अपने बेटे चाणक्य पंडित के लिए करनाल से टिकट चाहते थे।
हालांकि कांग्रेस ने दिव्यांशु बुद्धिराजा को टिकट दिया। इस फैसले से कुलदीप नाराज हो गए और उनका हुड्डा से दूरी बढ़ने लगी। वहीं अक्टूबर 2024 में कुलदीप शर्मा गन्नौर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी बने। उन्होंने लगभग 35,000 वोटों से हार का सामना किया।
इसके बाद हुड्डा से दूरी और बढ़ गई। साथ ही कुलदीप का दामाद BJP समर्थित है और कई पारिवारिक रिश्ते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते दिखते हैं।
कुलदीप शर्मा के बाद अन्य हुड्डा समर्थक नेताओं ने भी दूरी बनानी शुरू कर दी। वहीं रोहतक में नलवा विधानसभा से टिकट न मिलने के बाद नाराज पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह कुमारी सैलजा के साथ दिखे।
उन्होंने हाल ही में देवीलाल जयंती रैली में इनेलो नेता अभय चौटाला की भी तारीफ की। साथ ही करनाल की पूर्व विधायक सुमिता सिंह ने कुमारी सैलजा से मुलाकात की और बताया कि, वे कांग्रेस के हर नेता का स्वागत करेंगी। उन्होंने ये भी कहा कि वे हुड्डा से नाराज नहीं हैं।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि, पार्टी की लगातार तीन हार का जिम्मेदार भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैं। उनके नेतृत्व और टिकट वितरण के फैसले कई बार विवादास्पद साबित हुए। इससे अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष और हताशा पैदा हुई।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा की उम्र 79 साल हो चुकी है। अगले चुनाव तक वे 83 साल के हो जाएंगे। दूसरी ओर, कुमारी सैलजा 62 वर्ष की हैं और उनके पास लंबी राजनीतिक पारी खेलने का मौका है। कई कांग्रेस नेता अब उन्हें भविष्य की राजनीति के मजबूत चेहरे के रूप में देख रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं का ये भी कहना है कि, हुड्डा ने अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को प्रमुखता दी। इससे कांग्रेस की छवि एक परिवार की पार्टी के रूप में मजबूत हुई और अन्य वर्गों के नेताओं व कार्यकर्ताओं में हताशा बढ़ी।
फिलहाल हरियाणा की कांग्रेस में सैलजा और हुड्डा के बीच मतभेद अब साफ दिखने लगे हैं। नाराज नेताओं का सैलजा के समर्थन में खड़ा होना और हुड्डा से दूरी बनाना पार्टी के लिए नई चुनौती बन सकता है। आगामी चुनावों में इन खेमों के समीकरण पर नजर रखना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
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