मानेसर लैंड स्कैम में भूपेंद्र हुड्डा को झटका
हरियाणा के मानेसर लैंड स्कैम केस में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अब पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
सीबीआई पहले ही इस केस में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब हुड्डा के खिलाफ ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। एजेंसी ने अपनी जांच में जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा करते हुए पूर्व सीएम और कई अधिकारियों को आरोपी बनाया है।
मानेसर लैंड स्कैम की जांच का आदेश खुद सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में दिया था। अदालत ने पाया था कि, वर्ष 2007 में तत्कालीन हुड्डा सरकार द्वारा अधिग्रहण प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय दुर्भावनापूर्ण और धोखाधड़ीपूर्ण था।
कोर्ट ने इस फैसले को किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सीबीआई को आदेश दिया था कि, वे बिचौलियों और रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा कमाए गए अनुचित लाभ की जांच करे और राज्य सरकार “एक-एक पाई वसूल करे।”
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पंचकूला विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सुनवाई स्थगित करने की मांग खारिज की गई थी। सीबीआई कोर्ट ने 19 सितंबर को आदेश देते हुए कहा था कि, अब आरोप तय किए जाएंगे।
हुड्डा के वकीलों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि, जब सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सह-आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई है, तो बाकी आरोपियों पर आरोप तय करना “ट्रायल को दो हिस्सों में बांटने जैसा” होगा।
उनका कहना था कि, ये प्रक्रिया कानूनी रूप से गलत है। लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और साफ कहा कि, निचली अदालत का फैसला सही है। अब सीबीआई की विशेष अदालत में ही आरोप तय करने और ट्रायल शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
वहीं, इस केस में हुड्डा समेत 34 आरोपी हैं। जिनमें कई पूर्व अधिकारी, रियल एस्टेट कंपनियों के मालिक और बिचौलिये शामिल हैं। सीबीआई की जांच के अनुसार, 2007 से 2010 के बीच मानेसर, नौरंगपुर और लाखूवास गांवों में अधिग्रहण की प्रक्रिया के नाम पर किसानों से जमीन सस्ते दामों में ली गई।
जिसके बाद में उन्हीं जमीनों के लाइसेंस रियल एस्टेट कंपनियों को रियायती दरों पर जारी किए गए। एजेंसी का आरोप है कि, इस तरीके से सरकारी नीतियों का दुरुपयोग कर किसानों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया, जबकि बिचौलियों और बिल्डरों को बड़ा फायदा हुआ।
आपकों बता दें कि, सीबीआई ने इस केस में 80,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सभी 34 आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज हैं। जांच एजेंसी ने कहा है कि, सरकारी उद्देश्यों के नाम पर अधिग्रहण की घोषणा कर बाजार में डर पैदा किया गया, जिससे किसानों ने जमीन औने-पौने दामों में बेच दी।
बाद में अधिग्रहण की प्रक्रिया अचानक रद्द कर दी गई, जिससे निजी डेवलपर्स को फायदा पहुंचा। इसी साल जनवरी में सीबीआई ने अदालत से कहा था कि, पिछले चार वर्षों से आरोपियों के पक्ष में स्थगन आदेश होने के कारण ट्रायल रुका हुआ है।
अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद ये बाधा भी दूर हो गई है। अब सीबीआई की विशेष अदालत पंचकूला में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी। जिसके बाद गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर ट्रायल की सुनवाई चलेगी।
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