हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी ‘विजय संकल्प यात्रा’ की शुरुआत अंबाला से की है, जिसका उद्देश्य न केवल पार्टी को सशक्त करना है, बल्कि बीजेपी के जाट बनाम नॉन-जाट के नैरेटिव को तोड़ना भी है।
बीजेपी चुनावी रणनीति के तहत जाट बनाम नॉन-जाट के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है। पार्टी यह संदेश देने में जुटी है कि वोट कांग्रेस को नहीं, बल्कि हुड्डा (जाट नेता) को जाएगा। इससे कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस ने अपनी रणनीति को बदलते हुए दलित वोट बैंक को सुरक्षित रखने की कोशिश की है। पार्टी के रणनीतिकार सुनील कानूगोलू की टीम ने राहुल गांधी को यह रिपोर्ट दी थी कि बीजेपी सैलजा और हुड्डा के बीच की अंतर्कलह का फायदा उठाकर दलितों के बीच जाट समर्थक की छवि स्थापित कर रही है।
राहुल गांधी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य जाट बनाम नॉन-जाट की राजनीति को खत्म करना और दलितों के बीच एकजुटता का संदेश देना है।
राहुल गांधी की यात्रा का प्रारंभ अंबाला से हुआ, और इसका रुख कुरुक्षेत्र की ओर है।
इस यात्रा के दौरान 14 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जाएगा, जिससे कांग्रेस को जमीनी स्तर पर अपने समर्थकों को mobilize करने में मदद मिलेगी।
राहुल गांधी की उपस्थिति ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी है। उन्होंने जनता से वादा किया है कि कांग्रेस हरियाणा की जनता के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
राहुल ने अंबाला में कहा, “बीजेपी ने हरियाणा को धोखा दिया है। अब हरियाणा इस अन्याय का हिसाब करेगा।”
इस प्रकार, उनकी यात्रा न केवल चुनावी मैदान में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने की कोशिश है, बल्कि यह एक सशक्त राजनीतिक संदेश भी है जो बीजेपी के नैरेटिव को चुनौती देता है।
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