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Hardar movement intensifies against the repression of the BJP government: BJP सरकार के दमन के खिलाफ हड़दर आंदोलन तेज, राजकोट में किसानों से मिले अरविंद केजरीवाल

Hardar movement intensifies against the repression of the BJP government: BJP सरकार के दमन के खिलाफ हड़दर आंदोलन तेज

गुजरात में किसानों के समर्थन और उनके संघर्ष को नई ताकत देने के उद्देश्य से आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को राजकोट में पीड़ित किसानों और उनके परिवारों से मुलाकात की। पिछले दिनों हड़दर क्षेत्र में किसानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह पहला मौका था, जब केजरीवाल सीधे उन परिवारों तक पहुंचे, जिनके सदस्य आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए थे। केजरीवाल ने जेल से बाहर आए किसानों को सम्मानित किया और उनसे संवाद स्थापित किया।

इस दौरान केजरीवाल के साथ आप के वरिष्ठ नेता और गुजरात प्रभारी गोपाल राय, विधायक गोपाल इटालिया और पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम में किसानों और आप नेताओं की मौजूदगी ने इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश में बदल दिया। केजरीवाल ने किसानों से कहा कि वे केवल अपने गांव या अपने मुद्दों की लड़ाई नहीं लड़ रहे, बल्कि पूरे राज्य के किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने मंच से कहा कि भाजपा सरकार के दमन से पूरा गुजरात व्यथित है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत कर अंग्रेजों को देश से बाहर निकाला था। आज वैसी ही परिस्थितियाँ पैदा हो गई हैं, जब एक नई लड़ाई की जरूरत है। उनके अनुसार, “अंग्रेजों की तरह भाजपा भी अहंकार में डूबी है, लेकिन इस बार उसका यह गुमान टूटने वाला है।”

उन्होंने याद दिलाया कि वह पिछले महीने भी किसानों से मिलने गुजरात आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें किसानों तक पहुंचने नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाए कि भाजपा सरकार ने उनकी सभा को बाधित करने की कोशिश की, किसानों के लिए बनाए गए मंच को तुड़वा दिया और प्रदर्शन करने आए किसानों के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज की।

केजरीवाल ने कहा कि गुजरात का हड़दर आंदोलन अब भाजपा गुजरात छोड़ो आंदोलन का रूप ले रहा है। उनका दावा था कि जब तक गुजरात की जनता मतदान के माध्यम से भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं करेगी, तब तक न्याय संभव नहीं। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के दौरान 88 किसानों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनमें से किसी ने हिंसा नहीं की थी। “लोग सिर्फ करदा प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने आए थे और अपने हक की मांग कर रहे थे। लेकिन गुजरात की इस गांधीवादी धरती पर सरकार ने उनके खिलाफ दमन का रास्ता चुना।”

उन्होंने जानकारी दी कि 88 गिरफ्तार किसानों में से 42 फिलहाल रिहा हो चुके हैं, जबकि 46 अभी भी जेल में बंद हैं। आम आदमी पार्टी ने सभी किसानों की कानूनी मदद के लिए वकीलों की एक टीम तैयार की है। केजरीवाल ने घोषणा की कि पार्टी तब तक शांत नहीं बैठेगी, जब तक जेल में बंद हर किसान को रिहा नहीं करा लिया जाता।

कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर भी उन्होंने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में अवैध शराब और ड्रग्स खुलेआम बिक रहे हैं, लेकिन सरकार इन्हें रोकने में असफल है। केजरीवाल ने कहा, “ये लोग शराब बनाने और बेचने वालों को नहीं पकड़ेंगे, क्योंकि वे खुद इन लोगों को संरक्षण देते हैं। उल्टा किसानों को जेल में डालते हैं, जबकि असली अपराधी बाहर घूम रहे हैं।”

कार्यक्रम में मौजूद आप के गुजरात प्रभारी गोपाल राय ने भी किसानों के संघर्ष को आज़ादी की एक नई लहर बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों से गुजरात दमन और भय की राजनीति से प्रभावित रहा है, लेकिन हड़दर आंदोलन ने जनता के मन में नया साहस पैदा किया है। राय ने कहा कि अब यह आंदोलन केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आवाज पूरे राज्य में गूंज रही है।

गोपाल राय के अनुसार, सुदामड़ा गांव में हाल ही में जिस तरह हजारों किसान एकत्र हुए, उसने यह साबित कर दिया कि किसान अब चुप रहने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन के बाद जामनगर, खंभालिया, सोमनाथ, बारडोली, आनंद और बनासकांठा में भी किसानों की बड़ी सभाएँ आयोजित हो चुकी हैं। बढ़ते जनसमर्थन को देखते हुए अब 14 दिसंबर को कच्छ में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें भारी संख्या में किसानों के जुटने की संभावना है

पूरे कार्यक्रम में किसानों का उत्साह साफ दिखा। जेल से बाहर आए कई किसानों ने मंच पर आकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन पर बिना किसी अपराध के केस दर्ज किए गए और लंबे समय तक उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ा।

राजकोट में आयोजित यह सभा न केवल किसानों के मनोबल को बढ़ाने का काम कर रही है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नई बहस को जन्म दे रही है। हड़दर आंदोलन अब स्थानीय सीमा से बाहर निकलकर पूरे गुजरात के किसान संगठनों के लिए एक प्रतीक बन गया है।

Ritika Bhardwaj

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