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Gurugram: राहुल जोशी ने बॉडीबिल्डिंग में जीता देश के लिए मेडल

गुरुग्राम के राहुल जोशी ने हाल ही में नीदरलैंड के लिथुआनिया में आयोजित प्रोफेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में पहला स्थान हासिल कर भारत का नाम रोशन किया है। साइबर सिटी के सेक्टर 4 में रहने वाले राहुल ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।

राहुल की बॉडी बिल्डिंग की यात्रा 16 साल पहले शुरू हुई थी, जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे। तब से ही उन्हें इस खेल के प्रति गहरा रुझान था। उनका पैशन धीरे-धीरे प्रोफेशन में बदल गया और उन्होंने बॉडीबिल्डिंग इंस्ट्रक्टर के रूप में करियर की शुरुआत की। राहुल कहते हैं, “जब मैं बॉडी बिल्डिंग में शामिल हुआ, तो मुझे नहीं पता था कि यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।”

राहुल ने 2016 में एमैचोर कप जीतकर अपनी पहली सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और लगातार मेहनत की। अब तक, उन्होंने इंटरनेशनल स्तर पर 8 और राष्ट्रीय स्तर पर 6 मेडल जीते हैं। राहुल का कहना है कि यह सफलता उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। हाल ही में आयोजित चैंपियनशिप में, 18 देशों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें से 12 देशों ने भाग लिया। राहुल ने इस प्रतियोगिता में अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ सभी को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

राहुल की इस यात्रा में उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी मां और पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया, जबकि उनकी पत्नी ने उनकी डाइट का विशेष ध्यान रखा। राहुल कहते हैं, “मेरे माता-पिता और पत्नी ने मुझे हर कदम पर समर्थन दिया। उनकी प्रेरणा के बिना मैं इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाता।” अब जबकि राहुल ने एक बड़ा खिताब जीत लिया है, उनकी प्राथमिकता है कि वे अपने शरीर को थोड़ा आराम दें। इसके साथ ही, राहुल ने स्पोर्ट्स कोटे से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में आवेदन किया है, लेकिन उनकी ज्वाइनिंग अभी तक नहीं हुई है। वह पिछले चार साल से इस इंतजार में हैं कि कब उन्हें मौका मिलेगा। उनकी एकमात्र इच्छा है कि वे इनकम टैक्स ऑफिसर बनें, ताकि वे विभाग की तरफ से चैंपियनशिप में भाग ले सकें और अपने देश, प्रदेश और गुरुग्राम का नाम और भी ऊंचा कर सकें। वह मानते हैं कि एक सरकारी नौकरी उनके लिए नई चुनौतियों और अवसरों का द्वार खोलेगी।

राहुल जोशी की कहानी हमें यह सिखाती है कि यदि आपके पास लक्ष्य हो और उसे हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें न केवल व्यक्तिगत सफलता दिलाई है, बल्कि उन्होंने अपने देश का मान भी बढ़ाया है। उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा से अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करें और अपने पैशन को प्रोफेशन में बदलें।

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