GURJAR MAHAPANCHAYAT : क्या विजय बैंसला की चेतावनी के सामने झुकी सरकार,जानिए पुरा मामला
राजस्थान के टोंक जिले के पीलूपुरा में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में गुर्जर समाज के लोग जुटे। इस महापंचायत का नेतृत्व भाजपा नेता और समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने किया। उन्होंने मंच से राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर अति पिछड़ा वर्ग (MBC) को 5 प्रतिशत आरक्षण संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया, तो समाज एक बार फिर सड़कों पर उतरेगा।
गुर्जर समाज की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर सरकार ने इस बार कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं। आंदोलन और महापंचायत के दबाव में राज्य सरकार ने समाज की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। जिन मांगों पर सहमति बनी, उनमें शामिल हैं:
1. MBC आरक्षण विधेयक को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करना।
2. पूर्व आरक्षण आंदोलनों के दौरान हुए समझौतों को पूरी तरह से लागू करना।
3. सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ दिलाना।
4. देवनारायण योजना को प्रभावी रूप से लागू करना।
5. आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेना।
6. आंदोलन के दौरान मारे गए मृतकों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देना।
7. रीट भर्ती 2018 के शेष 372 पदों पर शीघ्र नियुक्ति करना।
इस महापंचायत के बाद विजय बैंसला को लेकर भाजपा के अंदर भी सवाल उठने लगे। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें देवली-उनियारा सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे कांग्रेस प्रत्याशी हरीश मीना से हार गए थे। इसके बाद से उन्हें पार्टी में हाशिए पर माना जा रहा था। उनके आंदोलन नेतृत्व करने पर भाजपा के भीतर अनुशासन और नेतृत्व पर सवाल उठने लगे।
हालांकि अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “विजय बैंसला ने अपनी समाज के लिए मांग उठाई है। मांग रखने का अधिकार सबको है, लेकिन अपनी मांगों के लिए आमजन को परेशान करना उचित नहीं है।”
महापंचायत में विजय बैंसला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गुर्जर समाज अब समझौतों के कागजों पर नहीं, धरातल पर लागू योजनाओं और आरक्षण के लाभ पर विश्वास करेगा। उन्होंने कहा, “अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो यह महापंचायत सिर्फ शुरुआत है। सरकार को चेतावनी देता हूं कि गुर्जर समाज को कमजोर मत समझो। हम अपने अधिकार लेकर रहेंगे।”
गुर्जर समाज राजस्थान में पिछले डेढ़ दशक से आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है। कई बार आंदोलन हिंसक भी हो चुके हैं, जिनमें जान-माल की हानि हुई है। 2008 से लेकर 2020 तक हुए कई आंदोलनों में दर्जनों जानें गईं और हजारों लोग घायल हुए। इसके बावजूद समाज की मांगों को अब तक पूर्णरूपेण अमल में नहीं लाया गया है।
राज्य सरकार और गुर्जर समाज के बीच बनी यह सहमति एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सहमति धरातल पर उतर पाएगी? विजय बैंसला की चेतावनी और गुर्जर समाज की लामबंदी को देखते हुए सरकार को जल्द और ठोस कदम उठाने होंगे, वरना राजस्थान में एक और बड़ा सामाजिक आंदोलन सिर उठा सकता है।
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