ED ने किया केजरीवाल की जमानत अर्जी का विरोध, कहा- “चुनाव प्रचार करना मौलिक अधिकार नहीं”

सुप्रीम कोर्ट कथित एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने पर 10 मई को अपना फैसला सुनाने वाला है. इससे एक दिन पहले यामी आज गुरुवार को ईडी ने अंतरिम जमानत याचिका पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है.

इस मामले में गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई करने वाली पीठ की अध्यक्षता करने वाले जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था, “हम शुक्रवार को अंतरिम आदेश (अंतरिम जमानत पर) सुनाएंगे. गिरफ्तारी को चुनौती देने से जुड़े मुख्य मामले पर भी उसी दिन फैसला किया जाएगा.’

ईडी की उप निदेशक भानु प्रिया ने केजरीवाल के अंतरिम जमानत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा विचार करने से एक दिन पहले अपना हलफनामा दाखिल किया. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के आधार पर सीएम केजरीवाल को अंतरिम जमानत देना, एक मिसाल कायम करेगा जो सभी बेईमान राजनेताओं को अपराध करने, चुनाव की आड़ में जांच से बचने की अनुमति देगा.

ईडी ने कहा कि, चुनाव प्रचार करने का अधिकार न तो मौलिक, न संवैधानिक और यहां तक ​​कि कानूनी अधिकार भी नहीं है. ईडी की जानकारी में ऐसा नहीं है कि, किसी भी राजनीतिक नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है, भले ही वह चुनाव भी क्यों न लड़ रहे हों. करीब 123 चुनाव हो चुके हैं, हम पिछले 3 वर्षों से हैं और यदि चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जानी है तो किसी भी राजनेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है और न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है क्योंकि चुनाव पूरे वर्ष होते हैं.

ईडी ने यह भी कहा कि, आम चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत देना केजरीवाल के पक्ष में कोई विशेष रियायत होगी. जो कानून के शासन और समानता के लिए अभिशाप की तरह होगा. ईडी ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि, यह एक मिसाल कायम करेगा जो सभी बेईमान राजनेताओं को अपराध करने, चुनाव की आड़ में जांच से बचने की अनुमति देगा.

यह देश में दो अलग-अलग वर्ग बनाएगा. एक तो वे सामान्य लोग जो कानून के शासन और देश के कानूनों के साथ-साथ बंधे हुए हैं, और दूसरे वह लोग जो राजनेता हैं और जो चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत हासिल करने की उम्मीद के साथ कानूनों से छूट मांग सकते हैं. कई राजनेता न्यायिक हिरासत में चुनाव लड़ चुके हैं, और कुछ जीत भी गए लेकिन उन्हें इस आधार पर कभी अंतरिम जमानत नहीं दी गई.

ईडी ने कहा कि, एक राजनेता एक सामान्य नागरिक से अधिक किसी विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता. समन से बचने के लिए केजरीवाल ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का भी यही बहाना बनाया था.

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