मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि मौजूदा प्रक्रिया के चलते देश की करीब 10 प्रतिशत वयस्क आबादी यानी लगभग 10 करोड़ नागरिकों के मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।
चिदंबरम की यह चिंता पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के उस अनुभव के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आई प्रशासनिक परेशानियों का उल्लेख किया था।
नवदीप सूरी की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए चिदंबरम ने आशंका जताई कि SIR के कारण देश में ऐसे नागरिकों की एक नई श्रेणी बन सकती है, जो नागरिक तो होंगे, लेकिन मतदाता सूची से बाहर होने के कारण वोट नहीं डाल पाएंगे। उन्होंने दावा किया कि प्रक्रिया की जटिलताओं के चलते बड़ी संख्या में पात्र नागरिक प्रभावित हो सकते हैं।
पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि वोटर आईडी और पहचान से जुड़े दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि 2003 की मतदाता सूची में उनके विवरण मेल नहीं खा रहे थे। उस समय वह लंदन में तैनात थे और पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके थे।
चिदंबरम ने इसी अनुभव को आधार बनाकर SIR प्रक्रिया में संभावित खामियों और उसके असर को लेकर चिंता जताई है।
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