फरीदाबाद के प्रतापगढ़ गांव में मौजुद कचरा प्लांट ग्रामीणों के विरोध के चलते नासूर बन गया है। पिछले एक महीने ये कचरे का प्लांट ठप होने की वजह से स्थानीय लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं । ऐसे में रोज़ाना निकल रहे कचरे को बंधवाड़ी भेजा जा रहा है। ओर प्रतापगढ़ समेत आस-पास के सभी गांव और कालोनीवासियों में विरोध जारी है। शहर में प्रतिदिन 1000 टन नागरिक कचरा उत्पन्न होता है। वर्षों से शहर कचरा निपटान संकट से जूझ रहा है। नगर निगम फरीदाबाद की ओर से प्रतिदिन 350 टन क्षमता वाला प्रतापगढ़ कचरा पृथक्करण और प्रसंस्करण प्लांट एक वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। इस दौरान प्रतापगढ़ गांव, राजीव कॉलोनी और सेक्टर-56 के निवासियों ने कचरा पृथक्करण और प्रसंस्करण प्लांट का विरोध शुरू कर दिया। ऐसे में शहर से निकलने वाले कचरे को निगम की ओर से अन्यत्र कहीं और भेजना पड़ रहा है।
वहां रह रहे एक निवासी का कहना है की प्रतापगढ़ पृथक्करण एवं प्रसंस्करण प्लांट की दीवार राजीव कॉलोनी से सटी है। कुछ दूरी पर प्रतापगढ़ गांव और सेक्टर-56 है। ऐसे में यहां से कचरे की दुर्गंध से आस-पास के लोगों का रहना मुश्किल है। इससे निवासियों को बीमारियों का भी खतरा है। प्लांट में एनजीटी के नियमों की पूरी तरह से पालना भी नहीं हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा इसके लिए हमने एनजीटी में अपील कर रखी है। इसकी सुनवाई 16 मई को होनी है। जल्द ही राजीव कालोनी, सेक्टर-56 और प्रतापगढ़ गांव के निवासी इसपर आंदोलन करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।
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