छत्तीसगढ़: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांग्लादेश हिंसा पर दी चेतावनी
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं, जहां भिलाई जिले में उनके पंच दिवसीय हनुमंत कथा का भव्य आयोजन चल रहा है। इस धार्मिक आयोजन के दौरान उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रही हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई और भारत सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो हिंदुओं की पहचान और अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि, ये केवल एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए चेतावनी है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को चाहे गोपनीय तरीके से या खुले तौर पर, बांग्लादेशी हिंदुओं की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उनका कहना था कि अगर आज हिंदू समाज उनके साथ खड़ा नहीं हुआ, तो हिंदू एकता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं जब हिंदुओं की स्थिति और सीमित हो जाएगी। हम विलुप्त तो नहीं होंगे, लेकिन हमारी संख्या, पहचान और प्रभाव लगातार घटता जाएगा।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों की जगह बांग्लादेशी हिंदुओं को शरण दी जानी चाहिए।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने साफ कहा कि केवल नारेबाजी और भाषणों से बांग्लादेशी हिंदुओं की रक्षा नहीं हो सकती। इसके लिए ठोस नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमारा भाई वहां मर रहा है, जल रहा है और हम यहां केवल भाषण दे रहे हैं, यह स्वीकार्य नहीं है। अब समय आ गया है कि भारत सरकार इस मुद्दे को वर्ल्ड लेवल पर उठाए।”
गौरतलब है कि हाल ही में बांग्लादेश में दो हिंदुओं—दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल—की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान खींचा है। इसी बीच, भिलाई में आयोजित पंच दिवसीय हनुमंत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
इस आयोजन में हनुमान चालीसा के आधार पर धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और भजन-कीर्तन किए जा रहे हैं। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि कथा के दौरान एक दिवसीय दिव्य दरबार का भी आयोजन होगा। उन्होंने भिलाई को शिक्षा और उद्योग की नगरी बताते हुए कहा कि यही वह भूमि है जहां से एक सशक्त और दिव्य भारत का सपना देखा जाता है।
हनुमंत कथा के मंच से उन्होंने हिंदू समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर हिंदू आज संगठित नहीं हुए, तो भविष्य में भारत के चौराहों पर भी बांग्लादेश जैसे हालात देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कांकेर जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हिंदुओं ने एकता दिखाई, जिसके कारण स्थिति संभली रही।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह भी ऐलान किया कि जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनता, तब तक वे देशभर में यात्राएं करते रहेंगे। उनका कहना है कि यह यात्राएं शांति, एकता और धार्मिक चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ और पूरे देश में शांति, समृद्धि और विकास की कामना भी की।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का संदेश साफ है—हिंदू समाज को जागरूक, संगठित और एकजुट होना होगा। उनके अनुसार, अगर समय रहते एकता नहीं दिखाई गई, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उनका यह अभियान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।
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