उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर आषाढ़ अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा दिख रहा है। बता दें कि, अमावस्या हिंदू चंद्र कैलेंडर में उस दिन को कहते हैं जब चंद्रमा रात में आसमान में दिखाई नहीं देता है। यह चंद्र मास के अंधेरे पक्ष के अंत का प्रतीक है।
आपको बता दें कि, आषाढ़ अमावस्या पितरों को याद करने और उनका पिंडदान करने का शुभ दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण करने से पितृ दोष दूर होते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं, पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और आध्यात्मिक पुण्य अर्जित करने के लिए दान करते हैं।
वहीं, एक श्रद्धालु ने बताया कि, “संगम का बहुत बड़ा महत्व है। आज जिनके पित्र नहीं हैं, उनको यहां पिंडदान (पूर्वजों की शांति के लिए अनुष्ठान) करना चाहिए, दान करना चाहिए। यही महत्व है।”
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