उत्तर प्रदेश

प्रयागराज महाकुंभ में 27 जनवरी को धर्म संसद का आयोजन, सनातन बोर्ड की मांग

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 27 जनवरी को एक अहम धार्मिक कार्यक्रम धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर के साधु-संत, शंकराचार्य और 13 अखाड़ों के प्रमुख शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में एक विशेष उद्देश्य को लेकर चर्चा की जाएगी, और वह उद्देश्य है सनातन बोर्ड की स्थापना। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने इस आयोजन को लेकर मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि इस धर्म संसद का प्रमुख उद्देश्य सनातनियों को एकजुट करना है और उन्हें एक नया रास्ता दिखाना है, जिसमें सनातन धर्म से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

धर्म संसद का उद्देश्य और महत्व

धर्म संसद का आयोजन विशेष रूप से सनातन धर्म के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए किया जा रहा है। देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि इस धर्म संसद में देशभर के प्रमुख संत और धार्मिक नेता एक मंच पर इकट्ठा होंगे, और इसमें एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। उनका कहना था कि सनातन धर्म के अनुयायी हमेशा एकजुट रहे हैं और वे हमेशा एकजुट रहेंगे। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि धर्म संसद में एक सनातन बोर्ड की मांग को लेकर रूपरेखा पूरी तरह से तैयार कर ली गई है, और यह सनातनियों के हित में होगा।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि इस बोर्ड का उद्देश्य सनातन धर्म से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाना और धर्मस्थलों के अधिकारों की रक्षा करना है। वह यह भी मानते हैं कि जब तक सनातन बोर्ड का गठन नहीं हो जाता, तब तक वे इस आंदोलन को छेड़े रखेंगे और इसके लिए काम करते रहेंगे।

सनातन बोर्ड के गठन की आवश्यकता

सनातन बोर्ड के गठन की बात को महंत रविंद्र पुरी ने भी बल दिया। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड न केवल धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करेगा, बल्कि इससे जुड़े अन्य मुद्दों को भी हल किया जाएगा। महंत रविंद्र पुरी ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड के पास पूरे देश में करीब 9 से 10 लाख एकड़ भूमि है। वह यह सवाल उठाते हैं कि यह भूमि कहां से आई और किस आधार पर इसे वक्फ बोर्ड के पास रखा गया है।

उनका मानना है कि जैसे मंदिरों और मठों की ज़मीन पर कब्ज़ा किया जा रहा है, यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि सनातन बोर्ड का गठन समय की आवश्यकता बन चुका है, ताकि इन मुद्दों को कानूनी तरीके से हल किया जा सके और धर्मस्थलों की भूमि की रक्षा की जा सके। महंत रविंद्र पुरी ने यह भी कहा कि वे और उनके साथी संतों ने इस बोर्ड का प्रारूप तैयार कर लिया है, और इसे जल्द ही धरातल पर उतारने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इसके लिए पहले मंदिरों, मठों और संतों की सहमति ली जाएगी।

वक्फ बोर्ड और मंदिरों की ज़मीन

महंत रविंद्र पुरी ने वक्फ बोर्ड के खिलाफ अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड के पास जितनी भूमि है, उसे लेकर सवाल उठना जरूरी है। वक्फ बोर्ड एक अहम धार्मिक संस्था है, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि इस तरह के बोर्डों का उपयोग अन्य धार्मिक समुदायों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने के लिए नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, वक्फ बोर्ड के पास जिस तरह की ज़मीन है, वह उस तरीके से नहीं दी जानी चाहिए, जिस तरह से आजकल मंदिरों और मठों की ज़मीन पर कब्ज़ा किया जा रहा है।

उनका कहना था कि इस असमानता को खत्म करने के लिए सनातन बोर्ड का गठन आवश्यक है, जो सिर्फ मंदिरों और मठों के अधिकारों की रक्षा नहीं करेगा, बल्कि उनके संचालन में भी मदद करेगा। उन्होंने कहा कि इस बोर्ड के गठन से धर्मस्थलों को मजबूती मिलेगी और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

सनातन बोर्ड का प्रारूप और आगे की योजना

महंत रविंद्र पुरी और देवकीनंदन ठाकुर दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि सनातन बोर्ड का प्रारूप पूरी तरह से तैयार किया जा चुका है। इस प्रारूप को जल्द ही लागू करने की योजना है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले धार्मिक नेताओं और संतों की सहमति प्राप्त की जाएगी। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वे सनातनियों के हितों की रक्षा करने के लिए एकजुट हैं और इस बोर्ड का गठन उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक कदम होगा।

इसके अलावा, यह बोर्ड भारतीय समाज में सनातन धर्म के महत्व को बनाए रखने और उसे सशक्त करने में भी मदद करेगा। यह एक ऐसा मंच होगा जहां सभी सनातन धर्म के अनुयायी अपने मुद्दों को एक साथ उठाकर समाधान पा सकेंगे।

सनातनियों की एकजुटता

इस धर्म संसद के आयोजन का एक मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के अनुयायियों को एकजुट करना है। देवकीनंदन ठाकुर ने यह स्पष्ट किया कि सनातन धर्म के अनुयायी हमेशा से एकजुट थे और वे हमेशा एकजुट रहेंगे। धर्म संसद में यह संदेश दिया जाएगा कि किसी भी प्रकार की असहमति या संघर्ष को छोड़कर, सभी सनातनियों को एक साथ आकर अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है, जहां सनातन धर्म के अनुयायी अपनी ताकत को पहचानेंगे और उसे सही दिशा में प्रयोग करेंगे।

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