उत्तर प्रदेश

प्रयागराज महाकुंभ से उठी सनातन बोर्ड बनाने की मांग, धर्म संसद में प्रस्ताव पास

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में धर्म संसद आयोजित की गई। जिसमें देश भर के प्रमुख साधु-संत शामिल हुए। इस धर्म संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सनातन बोर्ड बनाने की मांग की गई। इसके साथ ही धर्म संसद में सनातन बोर्ड के गठन का प्रस्ताव पास किया गया। धर्म संसद में बोर्ड को लेकर कहा गया कि इसे हिंदू अधिनियम 2025 के नाम से जाना जायेगा। धर्म संसद में कहा गया कि सनातन हिंदू बोर्ड एक स्वतंत्र निकाय के रूप में स्थापित होगा। साथ ही, इस पर सभी धर्माचार्यों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इसे पारित किया। हालांकि, सनातन धर्म संसद में 13 अखाड़े और सभी 4 शंकराचार्य शामिल नहीं हुए। इस प्रस्ताव के मुताबिक इसमें 11 सदस्यों का अध्यक्ष मंडल का होगा। जिसमें चारों संप्रदायों के प्रमुख जगतगुरु और तीन सदस्य सनातनी अखाड़ों के प्रमुख होंगे। एक सदस्य संरक्षक मंडल द्वारा नामित तीन सदस्य प्रमुख संत, कथावाचक और धर्माचार्य होंगे। धर्म संसद में पास किए गए सनातन बोर्ड के कार्य इस प्रकार हैं।

सनातन बोर्ड के कार्य

मठ-मंदिरों को सरकार से मुक्त कराना

मठ-मंदिरों में गौशाला और गुरुकुल की स्थापना

मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति

सनातन धर्म से जुड़े गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता

लव जिहाद और मतांतरण को रोकने के लिए काम

धर्म संसद में रखे गए प्रमुख प्रस्ताव

सनातन बोर्ड लागू किया जाए

मंदिरों से सरकारी नियंत्रण हटे

हर बड़े मंदिर में गौशाला स्थापित हो

मतांतरण रोकने को आर्थिक सहायता

अंतर्धार्मिक विवाह पर नियंत्रण

सरकार हिंदुओं को सनातन बोर्ड का तोहफा देगी:  देवकीनंदन ठाकुर

सनातन न्यास सेवा संस्थान के अध्यक्ष और आध्यात्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हमने सनातनी हिंदू बोर्ड अधिनियम के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है। यहां मौजूद सभी धार्मिक नेताओं ने इस पर सहमति व्यक्त की है। हम इस संविधान को भारत सरकार को भेजेंगे और इस पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनका समय मांगेंगे, इस उम्मीद के साथ कि अगर वक्फ बोर्ड है, तो सरकार हिंदुओं और सनातनियों को एक सनातन बोर्ड का तोहफा देगी। देवकीनंदन ठाकुर बताते हैं कि इस प्रारूप पर धर्म संसद में मौजूद सभी संतों का समर्थन प्राप्त है। प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित सनातन धर्म संसद का शुभारंभ जगतगुरु श्री राघवाचार्य जी महाराज और देवकीनंदन ठाकुर द्वारा दीप प्रज्वलित करने से हुआ। जिसे सर्व सम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

Rupesh Jha

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