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तुर्की के सेब पर प्रतिबंध की मांग ‘हिमालयन एप्पल ग्रोवर्स सोसाइटी’ ने पीएम को लिखा पत्र

 CHANNEL 4  NEWS INDIA


भारत की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जब तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया और उसे ड्रोन व हथियारों की सप्लाई की, तब से भारत में तुर्की के खिलाफ माहौल गर्म हो गया है। देश के कई हिस्सों में तुर्की की चीज़ों और सेवाओं के बहिष्कार की मांग उठ रही है। आम नागरिक से लेकर किसान और व्यापारी तक अब तुर्की से व्यापार रोकने की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब हिमालयी राज्यों के सेब उत्पादक किसान भी तुर्की के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। हिमालयन एप्पल ग्रोवर्स सोसाइटी, जो इन किसानों का प्रमुख संगठन है, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर तुर्की से सेब आयात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

तुर्की के सेब से भारत के सेब उद्योग को नुकसान

इस संगठन का कहना है कि तुर्की से आने वाले सस्ते सेबों ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे राज्यों के सेब उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है। इन राज्यों में लाखों किसान सेब की खेती पर निर्भर हैं और उनकी आजीविका, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान सब कुछ सेब उत्पादन से जुड़ी हुई है। लेकिन तुर्की से भारी मात्रा में सस्ते सेब आयात किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों को अपने सेब के वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे।भारत हर साल तुर्की से 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब आयात कर रहा है। इससे हिमाचल प्रदेश का 5,500 करोड़ रुपए का सेब उद्योग खतरे में आ गया है। किसानों का कहना है कि जब उनकी मेहनत की कमाई को तुर्की के आयात ने निगलना शुरू कर दिया है, तो सरकार को तुरंत एक्शन लेना चाहिए।

तुर्की ने दिया भारत के दुश्मन देश का साथ

तुर्की से सेब आने का असर सबसे ज़्यादा हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर पर पड़ा है। इन राज्यों के किसान पहले ही जलवायु परिवर्तन, भारी लागत और बाजार की अनिश्चितता से जूझ रहे थे। अब तुर्की के सेबों ने उनकी कमर तोड़ दी है। थोक में सस्ते दाम पर आने वाले सेबों की वजह से स्थानीय सेब की कीमतें गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी घाटा हो रहा है। किसानों का कहना है कि तुर्की जब पाकिस्तान जैसे देश के साथ मिलकर भारत के खिलाफ खड़ा है, तो उसके सेब खरीदना कहीं से भी उचित नहीं है। यह न सिर्फ आर्थिक नुकसान है, बल्कि राष्ट्रहित के खिलाफ भी एक तरह की गलती है।

 

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