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रायपुर क्षेत्रीय कार्यशाला में वैश्विक अन्न भंडारण योजना, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 और 2 लाख नई सहकारी समितियों की प्रगति की समीक्षा पर मंथन

रायपुर, छत्तीसगढ़ में सहकारिता मंत्रालय की ओर से एक बड़ी क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में “विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना”, “व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0” और “2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन” की प्रगति की समीक्षा की गई। कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नाबार्ड, एफसीआई, नेफेड, एनसीसीएफ, एनडीडीबी और वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला का उद्देश्य देश में सहकारी व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराना था। केंद्र सरकार “सहकार से समृद्धि” के मंत्र के तहत गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने बताया कि डेयरी सेक्टर ने गुजरात जैसे राज्यों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। अब पूर्वी और मध्य भारत के राज्यों में भी डेयरी क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि इन राज्यों में जल संसाधन, उपजाऊ जमीन और पशुधन की अच्छी उपलब्धता है, जिससे डेयरी कारोबार को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। डॉ. भूटानी ने राज्यों से अपील की कि वे अपनी चुनौतियों और सुझावों को खुलकर साझा करें ताकि व्यावहारिक समाधान निकाले जा सकें।

कार्यशाला में महिलाओं की भूमिका पर भी खास जोर दिया गया। बताया गया कि डेयरी सहकारी समितियों से जुड़कर महिलाएं अब केवल गृहिणी नहीं रह गई हैं, बल्कि वे उद्यमी बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रही हैं। इससे महिलाओं को रोजगार, आर्थिक मजबूती और फैसले लेने में भागीदारी का मौका मिल रहा है।

सहकारिता मंत्रालय ने व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 के तहत अगले पांच साल में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने और 46 हजार पुरानी समितियों को मजबूत करने के लक्ष्य की समीक्षा भी की। मंत्रालय ने कहा कि डेयरी सेक्टर को सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि बायोगैस, ऑर्गेनिक खाद, व्हे प्रोटीन और कार्बन क्रेडिट जैसे नए क्षेत्रों में भी काम बढ़ाना चाहिए।

कार्यशाला में सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर इकोनॉमी पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय ने कहा कि गोबरधन योजना, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और बायो-एनर्जी जैसे प्रोजेक्ट किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे। इससे ऊर्जा संकट और आयातित ईंधन पर निर्भरता भी कम होगी।

छत्तीसगढ़ सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने कहा कि राज्य सरकार डेयरी विकास, बायोगैस परियोजनाओं और अन्न भंडारण सुविधाओं को तेजी से बढ़ाने पर काम कर रही है।

कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, मल्टीपर्पज पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन, निष्क्रिय समितियों को दोबारा सक्रिय करने और व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0 को लागू करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा सोलर रूफटॉप, फ्लेवर्ड मिल्क उत्पाद, चारा और पशु आहार व्यवसाय जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, नियमित समीक्षा और मिशन मोड में काम करने की जरूरत है। साथ ही सफल मॉडलों और अनुभवों को साझा करने पर भी जोर दिया गया।

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