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“Defining love jihad”: ओवैसी ने दी RSS और BJP को बड़ी चुनौती, बोले ओवैसी- “लव जिहाद की परिभाषा बताएं”, “संसद में लव जिहाद के आंकड़े क्यों नहीं देते?”

“Defining love jihad”: ओवैसी ने दी RSS और BJP को बड़ी चुनौती

 

एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इस बार उनका निशाना ‘लव जिहाद’ को लेकर किए जा रहे दावे हैं। ओवैसी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत और बीजेपी से लव जिहाद की स्पष्ट परिभाषा और उससे जुड़े ठोस आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अगर देश में वास्तव में लव जिहाद जैसी कोई संगठित गतिविधि हो रही है, तो उसके आंकड़े संसद में क्यों नहीं पेश किए जाते।

ओवैसी ने कहा कि बीजेपी पिछले कई वर्षों से लव जिहाद का मुद्दा उठा रही है और इसे लेकर कई तरह के राजनीतिक और सामाजिक दावे किए जा रहे हैं। कुछ राज्यों में इस आधार पर कानून भी बनाए गए हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकार और संघ यह स्पष्ट करें कि लव जिहाद की उनकी परिभाषा क्या है और इसके समर्थन में उनके पास क्या प्रमाण हैं। ओवैसी ने चुनौती देते हुए कहा कि बीजेपी शासित राज्यों से जुड़े पिछले 11 वर्षों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जिसमें यह दिखाया गया हो कि कहां-कहां और कितनी घटनाएं लव जिहाद के नाम पर दर्ज की गईं।

ओवैसी ने सवाल उठाया कि संसद देश का सर्वोच्च विधायी मंच है और यदि सरकार के पास इस तरह के गंभीर आरोपों से जुड़ा डेटा मौजूद है, तो उसे संसद में पेश क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि बिना परिभाषा और बिना आंकड़ों के किसी समुदाय या युवाओं के निजी फैसलों को संदेह के दायरे में लाना संविधान की भावना के खिलाफ है। उनका कहना था कि लव जिहाद शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक बयानबाजी और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

एआईएमआईएम अध्यक्ष ने युवाओं की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद के अधिकार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवक या युवती 19 से 21 वर्ष की आयु के बीच है और कानूनन वयस्क है, तो उसे अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है। यह किसी की व्यक्तिगत पसंद या नापसंद का विषय हो सकता है, लेकिन कानून ऐसे फैसलों की अनुमति देता है। ओवैसी ने कहा कि दो वयस्कों के बीच सहमति से होने वाले संबंधों को किसी साजिश या अपराध के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में लव जिहाद का मुद्दा उठाया था। भागवत ने अपने संबोधन में कहा था कि लव जिहाद को रोकने के लिए समाज और परिवारों के स्तर पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि परिवारों के भीतर संवाद की कमी के कारण युवा बाहरी प्रभावों में आ जाते हैं और इसी का फायदा कुछ लोग उठाते हैं।

संघ प्रमुख ने महिलाओं को जागरूक करने पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि कुछ मामलों में धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से ही हिंदू महिलाओं से विवाह किया जाता है। भागवत के अनुसार, परिवारों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि कोई लड़की किसी अजनबी से कैसे और किन परिस्थितियों में प्रभावित हो सकती है। उन्होंने लव जिहाद को केवल कानूनी या राजनीतिक मुद्दा न मानते हुए सामाजिक और पारिवारिक समस्या के रूप में प्रस्तुत किया था।

बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों द्वारा लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि लव जिहाद के जरिए एक विशेष समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है और इसके पीछे संगठित प्रयास हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और अन्य कुछ राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों को सख्त किया गया है। इन कानूनों के तहत जबरन या धोखे से कराए गए धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

हालांकि, ओवैसी का तर्क है कि इन कानूनों और दावों के बावजूद अब तक केंद्र सरकार की ओर से संसद में कोई समेकित आंकड़ा पेश नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि लव जिहाद एक संगठित और व्यापक समस्या है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास ठोस तथ्य हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि देश में भ्रम और अफवाहों की स्थिति न बने।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लव जिहाद का मुद्दा अक्सर चुनावी और वैचारिक बहस के केंद्र में रहता है। एक ओर बीजेपी और संघ इसे सामाजिक सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं, वहीं ओवैसी जैसे नेता इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सवाल बताते हैं। इस बहस के बीच आंकड़ों, परिभाषा और कानूनी व्याख्या की मांग लगातार उठती रही है।

ओवैसी के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या लव जिहाद को लेकर किए जा रहे दावे ठोस आंकड़ों पर आधारित हैं या यह मुख्य रूप से राजनीतिक और वैचारिक विमर्श का हिस्सा है। संसद में डेटा पेश करने और स्पष्ट परिभाषा तय करने की मांग ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

Owaisi ने दी RSS और BJP को बड़ी चुनौती, “संसद में लव जिहाद के आंकड़े क्यों नहीं देते?”

 

Kirti Bhardwaj

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