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CROWD IN ELECTION RALLEY: चुनावी रैलियों की भीड़ पर कमल हासन का बयान, कहा: “भीड़ के सभी लोग नहीं देंगे आपको वोट”, अभिनेता से नेता बने विजय को दी हासन ने सलाह

CROWD IN ELECTION RALLEY: चुनावी रैलियों की भीड़ पर कमल हासन का बयान

देशभर में चुनावी मौसम आते ही राजनीतिक रैलियों का दौर शुरू हो जाता है। हर राजनीतिक दल और नेता जनता को अपने पक्ष में करने के लिए बड़े-बड़े आयोजन (CROWD IN ELECTION RALLEY) करता है। इन आयोजनों में उमड़ने वाली भारी भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) को देखकर यह अनुमान लगाया जाता है कि किस नेता या पार्टी को जनसमर्थन मिल रहा है। मगर, क्या रैली में जुटने वाली भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) का मतलब वास्तव में वोट में तब्दील होना है? इसी सवाल को लेकर अब अभिनेता से राजनेता बने और मक्कल निधि मय्यम (MNM) के प्रमुख कमल हासन ने एक अहम बयान दिया है

कमल हासन ने साफ तौर पर कहा है कि, किसी भी रैली में उमड़ने वाली भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) का यह मतलब निकाल लेना कि वे सभी लोग वोट भी देंगे, यह एक गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि यह नियम सिर्फ एक पार्टी या व्यक्ति पर नहीं, बल्कि देश के हर नेता और राजनीतिक दल पर लागू होता है। चाहे वह खुद हों, विजय हों या फिर तमिलनाडु की किसी भी पार्टी का नेता।

कमल हासन का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर अभिनेता से नेता बने विजय की एक रैली के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में लाखों की संख्या (CROWD IN ELECTION RALLEY) में लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। विजय की इस रैली को लेकर कई राजनीतिक विश्लेषकों ने दावा किया कि यह आने वाले चुनावों में सत्तारूढ़ दल के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर कुछ विरोधी दलों ने इसे “खोखली सभा” कहकर खारिज भी कर दिया।

कमल हासन ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि भीड़ जुटाना आसान हो सकता है, लेकिन उस भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) को वोट में बदलना असली चुनौती होती है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि जो लोग आपकी सभा में आए हैं, वही आपको वोट भी दें। कई बार लोग महज उत्सुकता या मनोरंजन के उद्देश्य से भी रैलियों में शामिल हो जाते हैं।

कमल हासन ने विजय को एक जिम्मेदार राजनेता की तरह सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि विजय को सही रास्ते पर चलना चाहिए, जनता की भलाई के लिए काम करना चाहिए और लोकतंत्र की असली परिभाषा को समझते हुए राजनीति में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विजय के लिए मेरी यही अपील है कि वे धैर्य रखें, लोगों से जुड़ें और केवल भाषणों या भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) पर निर्भर न रहें।

गौरतलब है कि विजय की पार्टी ‘वोदित तमिलगा वेत्री कजगम’ (TVK) की यह दूसरी बड़ी रैली थी, जिसमें उन्होंने जनता से सीधे संवाद किया। इस रैली में विजय ने भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) से कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि आप लोग वोट नहीं देंगे। इसके जवाब में भीड़ ने जोरदार नारेबाजी करते हुए “विजय-विजय” के नारे लगाए। इस पर विजय ने कहा कि TVK का उद्देश्य “एक ऐसा लोकतंत्र बनाना है जिसमें विवेक हो और जनता की भागीदारी वास्तविक हो।”

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में फिर से बहस छिड़ गई है कि क्या बड़ी रैली (CROWD IN ELECTION RALLEY) करना सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गया है? क्या अब राजनीतिक दलों को रणनीति में बदलाव करना चाहिए? क्या जनता को भी अब इस तरह की रैलियों को देखकर भ्रमित नहीं होना चाहिए?

कमल हासन का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह खुद भी फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए हैं और उन्होंने भी बड़े-बड़े जनसमूहों (CROWD IN ELECTION RALLEY) को संबोधित किया है। इसके बावजूद, वह अब राजनीति की हकीकत को खुलकर स्वीकार कर रहे हैं कि हर भीड़ वोट में नहीं बदलती। उनके इस बयान को तमिलनाडु की राजनीति में एक परिपक्व सोच के रूप में देखा जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक रैलियों की चमक-धमक और भारी भीड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) वाकई चुनाव परिणामों को दर्शाती है? या फिर यह सिर्फ एक भ्रम है, जो समय आने पर टूट जाता है?

कमल हासन के इस बयान और विजय की रैली के बाद तमिलनाडु की राजनीति एक दिलचस्प मोड़ (CROWD IN ELECTION RALLEY) पर खड़ी हो गई है। सभी दल अब नई रणनीति पर मंथन कर रहे हैं और जनता की नब्ज को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

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