कांग्रेस ने रविवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की अदाणी समूह के खिलाफ चल रही जांच की धीमी प्रगति पर चिंता जताई है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने SEBI पर निशाना साधते हुए कहा कि इस जांच में सुस्ती बरती जा रही है और SEBI को इस बारे में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
रमेश ने मीडिया में आई एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा जनवरी 2023 में अदाणी समूह के बारे में की गई रिपोर्ट के आधार पर मॉरीशस में स्थित दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने SEBI के नए नियमों से राहत की मांग करते हुए प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन FPI पर SEBI के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है, जिनके तहत एक ही स्टॉक में अत्यधिक निवेश की अनुमति नहीं है। यह नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि मॉरीशस जैसे कर चोरी के लिए पनाहगाह बने देशों से काला धन भारतीय बाजारों में प्रवेश न कर सके।
रमेश ने अपने बयान में कहा, “ये वही FPI हैं जिन पर SEBI के नियमों का उल्लंघन करने और अपनी कंपनियों में बेनामी हिस्सेदारी हासिल करने का आरोप है। SEBI ने ऑफशोर फंड्स के ‘अंतिम लाभकारी’ की पहचान की आवश्यकता को हटाया, जिससे इन कंपनियों को लाभ हुआ। यह निर्णय जून 2023 में जनता के दबाव के चलते वापस लिया गया था।”
उन्होंने यह भी कहा कि SEBI की इस जांच की प्रक्रिया, जिसे दो महीने में पूरा किया जाना था और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था, अब 18 महीने बाद भी सुस्त पड़ी हुई है। रमेश ने SEBI को इसके अध्यक्ष के हितों के टकराव और अन्य मुद्दों पर भी स्पष्टीकरण देने की मांग की।
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