Category: स्वामी अवधेशानंद जी गिरि जी

प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज जी

प्रेमानंद महाराज जी ने माता-पिता को दी ये नसीहत

आज के दौर में माता-पिता दोनों ही नौकरी कर रहे हैं, ताकि वो अपने और परिवार का भविष्य बेहतर बना…

मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक आत्मज्ञान की दीपशिखा है

मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक आत्मज्ञान की दीपशिखा है, जो साधक के भीतर के समस्त बन्धनों को जला देता है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 12 जुलाई, 2025 (शनिवार) भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः। क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे…

भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य के अनुसार, ब्रह्म शब्दातीत, अव्यवहित और निर्गुण है

यह मंत्र आत्मा के उस प्रकाश की अनुभूति है, जो न भीतर है, न बाहर — वह सर्वत्र है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 11 जुलाई, 2025 (शुक्रवार) “यः सर्वज्ञः सर्वविद् यस्यैष महिमा भुवि। दिव्ये ब्रह्मपुरे…

मनुष्य की क्षमताएं अपार हैं। हममें अतुल्य तेज एवं अपूर्व सामर्थ्य हैं; बस इन्हें पहचानने की आवश्यकता है।

ब्रह्म ही जगत का आधार है, आत्मा ही ब्रह्म का प्रतिबिम्ब है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 09 जुलाई, 2025 (बुधवार) यस्मिन् द्यौः पृथिवी चान्तरिक्षमोतं मनः सह प्राणैश्च सर्वैः…

मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक आत्मज्ञान की दीपशिखा है

मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक उत्कृष्ट रूपक के माध्यम से उस आध्यात्मिक साधना की व्याख्या करता है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 07 जुलाई, 2025 (सोमवार) धनुर्गृहीत्वौपनिषदं महास्त्रं शरं ह्युपासा निशितं सन्धयीत । आयम्य…

भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य के अनुसार, ब्रह्म शब्दातीत, अव्यवहित और निर्गुण है

भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य के अनुसार, ब्रह्म शब्दातीत, अव्यवहित और निर्गुण है

“दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्; ध्यानम्” मौनव्याख्या प्रकटित परब्रह्मतत्त्वं युवानं वर्षिष्ठान्ते वसदृषिगणैः आवृतं ब्रह्मनिष्ठैः। आचार्येन्द्रं करकलितचिन्मुद्रमानन्दरूपं स्वात्मारामं मुदितवदनं दक्षिणामूर्तिमीडे ॥१॥ भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य…

"उपनिषद् के इस मंत्र में ऋषि एक अद्भुत रहस्य खोलते हैं"

“उपनिषद् के इस मंत्र में ऋषि एक अद्भुत रहस्य खोलते हैं”

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् — “प्रभुश्री की लेखनी से” — 01 जुलाई, 2025 (मंगलवार) तस्माच्च देवा बहुधा संप्रसूताः साध्या मनुष्याः पशवो वयांसि…

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भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा: अद्वैत वेदान्त की चेतना यात्रा का उत्सव

“नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः॥” भगवान श्री जगन्नाथ – जो नीलाचल के नित्य निवासी, परमात्मा, परमसत्य…

भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य के अनुसार, ब्रह्म शब्दातीत, अव्यवहित और निर्गुण है

मुण्डकोपनिषद् के इस महामंत्र में उपनिषदकार हमारी दृष्टि को संसार के रूप और सीमाओं से परे ले जाते हैं

दिव्यो ह्यमूर्तः पुरुषः स बाह्याभ्यन्तरो ह्यजः । अप्राणो ह्यमनाः शुभ्रो ह्यक्षरात् परतः परः ॥ – मुण्डकोपनिषद् २.१.२ मुण्डकोपनिषद् के इस…