UP News: कैबिनेट मंत्री ने किया बड़ा दावा, ‘अखिलेश यादव की सपा में होगी बड़ी टूट’

महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की राजनीति में दल-बदल और बगावत की चर्चाओं के बीच अब उत्तर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा दावा किया है। राजभर ने कहा कि आने वाले दिनों में सपा को बड़ा झटका लग सकता है और पार्टी के कई नेता भाजपा के संपर्क में हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने दावा करते हुए कहा कि लोग महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल की बात कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में भी जल्द बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सिर्फ कुछ नेता ही नहीं, बल्कि पूरी समाजवादी पार्टी भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार बैठी है। हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में किसी नेता का नाम नहीं लिया और न ही कोई ठोस सबूत पेश किया।

राजभर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और नए समीकरण बनाने में जुटे हुए हैं। ऐसे माहौल में राजभर के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

वहीं समाजवादी पार्टी ने राजभर के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सपा प्रवक्ता सुनील साजन ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल आगामी चुनावों को लेकर घबराए हुए हैं। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश राजभर केवल मीडिया में बने रहने और अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए इस तरह के बयान देते रहते हैं।

सुनील साजन ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया था और अब 2027 के विधानसभा चुनाव में भी जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में राजभर की पार्टी का एक भी विधायक जीतकर विधानसभा नहीं पहुंचेगा। साजन ने कहा कि राजभर का काम सिर्फ बयानबाजी करना रह गया है।

इस बीच ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे समाजवादी पार्टी के नेताओं की बेचैनी भी बढ़ रही है। राजभर ने खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश जानता है कि इन मामलों में किन नेताओं के नाम चर्चा में रहे हैं।

राजभर ने कहा कि जब जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं तो कुछ नेताओं की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने किसी नए मामले या किसी संभावित दल-बदल करने वाले नेता का नाम नहीं लिया। इसके बावजूद उनका बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अपने बयान के दौरान राजभर ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की।

यह पहली बार नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग देखने को मिली हो। पिछले कुछ महीनों से राजभर लगातार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमलावर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव के विदेश दौरे पर सवाल उठाए थे।

राजभर ने तंज कसते हुए कहा था कि अगर अखिलेश यादव को घूमने ही जाना था तो लंदन और पेरिस जाने की बजाय उन्हें काशी, अयोध्या, मथुरा, नैमिषारण्य और मां विंध्यवासिनी धाम जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों का दौरा करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा मिलता और स्थानीय व्यापारियों को भी फायदा होता।

राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि ऐसे दौरों से फूल बेचने वाले, मिठाई विक्रेता, छोटे होटल संचालक, टैक्सी चालक और अन्य कारोबारियों को रोजगार मिलता। साथ ही उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी मजबूती मिलती।

उन्होंने आगे कहा कि नया भारत और नया उत्तर प्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा और देश के कई अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं। राजभर का कहना था कि अपने देश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने में पूरी जिंदगी भी कम पड़ सकती है।

फिलहाल राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। एक तरफ उन्होंने समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट का दावा किया है, तो दूसरी ओर सपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर भाजपा और उसके सहयोगियों पर राजनीतिक घबराहट का आरोप लगाया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह बयानबाजी केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहती है या फिर प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

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