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बिहार: 15 मिनट के ब्लैकआउट के दौरान मसाला कारोबारी की हत्या, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

बिहार में नई सरकार बनने के बाद मानो अपराध और अपराधियों की संख्या भी बढ़ने लगी है। सीएम सम्राट चौधरी ने गृह विभाग भी अपने पास ही रखा है क्योंकि, उनका मानना है कि, यूपी की तर्ज पर बिहार में भी अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाना है। लेकिन, पटना में गुरुवार शाम को हुई वारदात ने एक बार फिर से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि, गुरुवार को माहौल था देशभक्ति, सुरक्षा और आपदा से निपटने की तैयारी का पूरा शहर युद्ध जैसी आपात स्थिति से निपटने की मॉकड्रिल में हिस्सा ले रहा था। सायरन बज रहे थे… लाइटें बंद हो रही थीं… और लोग ब्लैकआउट की प्रैक्टिस कर रहे थे। लेकिन इसी अंधेरे ने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए उजाड़ दी।

ब्लैकआउट के दौरान पटना में एक मसाला कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अब सवाल उठ रहा है कि सुरक्षा अभ्यास के बीच अपराधी कैसे वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया? गुरुवार शाम ठीक 7 बजे पटना समेत बिहार के छह जिलों में ब्लैकआउट शुरू हुआ। यह मॉकड्रिल भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित की गई थी। शहर की बत्तियां बुझ चुकी थीं, सड़कें अंधेरे में डूब गई थीं और प्रशासन युद्ध जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी का अभ्यास कर रहा था। लेकिन इसी दौरान पटना के मुसल्लहपुर इलाके में 25 वर्षीय मसाला कारोबारी पिंटू कुमार अपनी दुकान के पास खड़े थे। परिवार और आसपास के लोग अभी ब्लैकआउट को समझ ही रहे थे कि तभी अंधेरे का फायदा उठाकर एक अपराधी वहां पहुंचा और अचानक फायरिंग कर दी।

बताए कि, गोली सीधे पिंटू कुमार के सिर में लगी। फायरिंग की आवाज सुनते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। अंधेरे में लोग कुछ समझ पाते उससे पहले आरोपी मौके से फरार हो चुका था। घायल पिंटू को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार वालों का कहना है कि कुछ दिन पहले पिंटू का एक व्यक्ति से विवाद हुआ था। हालांकि पुलिस अभी हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि ब्लैकआउट के कारण आरोपी का चेहरा साफ दिखाई नहीं दिया इसलिए पहचान में मुश्किल आ रही है।

दरअसल, यह पूरी मॉकड्रिल आपदा प्रबंधन विभाग, नागरिक सुरक्षा निदेशालय और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य युद्ध या आपात स्थिति में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को परखना था। शाम 7 बजे से 7 बजकर 15 मिनट तक चले इस अभ्यास में एयर रेड वार्निंग, निकासी प्रक्रिया, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल रिस्पॉन्स, अग्निशमन और ब्लैकआउट जैसे अहम पहलुओं की प्रैक्टिस की गई।
पटना में समाहरणालय, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और IGIMS जैसे प्रमुख स्थानों पर मॉकड्रिल की गई।

वहीं किशनगंज, बेगूसराय और कटिहार समेत कई जिलों में भी प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में नजर आईं। नागरिक सुरक्षा निदेशालय के महानिदेशक परेश सक्सेना कंट्रोल रूम से पूरे अभियान की निगरानी करते रहे, जबकि आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों से जुड़े रहे।
एक तरफ बिहार आपात हालात से निपटने की तैयारी का अभ्यास कर रहा था। दूसरी तरफ उसी ब्लैकआउट के अंधेरे में अपराधियों ने एक युवक की जान ले ली। अब यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल बन गई है।

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